मेरठ के प्रमुख उद्योग
खेलकूद उपकरण व क्रिकेट किट निर्माण, बैंड बाजा व संगीत उपकरण इकाइयां, कैंची उद्योग, कृषि उपकरण निर्माण, पेपर मिल, शुगर मिल, डाइंग एंड प्रिंटिंग, कालीन उद्योग, बिजली के तार, वायर व अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण निर्माण, प्रकाशन उद्योग, ट्रांसफार्मर निर्माण, फूड एंड बेवरेज, डेयरी एवं मिल्क प्रोडक्ट, केमिकल इंडस्ट्री, दवा निर्माण, खाद व यूरिया, मीट निर्यात, रबर और कास्टिंग इकाइयां में हैं। इसके अलावा वुडन और स्टील फर्नीचर इकाइयां, वाहनों के कलपुर्जों का निर्माण, फूड प्रोसेसिंग इकाइयां, कैपिटल गुड्स, हैवी इंजीनियरिंग आइटम, सोना व चांदी का बड़ा कारोबार भी हैं।
इंटरनल कनेक्टिविटी बढ़े, कम हो डेवलपमेंट चार्ज
आउटर के साथ इंटरनल कनेक्टिविटी पर काम हो, डेवलपमेंट चार्जेज कम हों। बैंकों की ब्याज दरें घटाई जाएं। मोहकमपुर फेज वन, फेज टू, स्पोर्ट्स एंक्लेव, साईंपुरम जैसे जो पुराने निजी औद्योगिक क्षेत्र हैं, उन्हें सरकार रेग्युलाइज करे।
-अतुल भूषण गुप्ता, चेयरमैन आईआईए मेरठ
उद्यमियों की मांगें, जो नहीं बनीं मुद्दा
- नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएं, अपंजीकृत इकाइयों को पंजीकृ त कराया जाए, पंजीकरण के नियमों का सरलीकरण हो।
- मेरठ में बनने वाले सामान को जैम पोर्टल पर लाकर, 20 प्रतिशत सामान की खरीद एमएसएमई सेक्टर से करने के नियम का पालन हो।
- देश के शिल्पग्रामों, हाटों व इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, मेट्रो स्टेशन सहित जो बड़े प्रोजेक्ट हैं, वहां मेरठ के खेल उद्योग, सराफा कारोबार, कालीन, बैंडबाजा, खादी उद्योग, हस्तशिल्प के स्टॉल को छूट पर लगाया जाए।
- जीएसटी में पारदर्शिता लाई जाए, डिफेंस कॉरिडोर पर सरकार ने वहीं की एमएसएमई से बना सामान खरीदने का जो नियम बनाया है, वो मेरठ में भी लागू हो।
- उद्योग स्थापना के लिए सेंट्रल ग्राउंड वॉटर की एनओसी को खत्म कर केवल राज्य सरकार से अनुमति लेने का नियम लागू हो, आयकर के स्लैब में छूट दी जाए।
- रेडी टू स्टार्ट प्रोडक्शन वाले औद्योगिक क्षेत्र विकसित हों, जहां उद्यमी जाएं, मशीन लगाए और प्रोडक्शन शुरू कर दें। किसी प्रकार की एनओसी या शुल्क जैसी बंदिशें न हों। उद्यमियों को सब्सिडी से ज्यादा सुविधाएं चाहिए। फ्रेट कॉरिडोर के दोनों ओर इंडस्ट्रियल एरिया डेवलप करने पर काम हो।
2017 के बाद बंद नहीं हुआ कोई उद्योग
मुजफ्फरनगर। 2013 के दंगे के बाद यहां 40 फैक्ट्री बंद हो गई थीं, इनमें अधिकतम लोहा फैक्ट्री थीं। 2017 के बाद कोई उद्योग बंद नहीं हुआ। लखनऊ में हुई इन्वेस्टर समिट में जिले में 26 उद्यमियों ने दो हजार करोड़ का इन्वेस्ट कराने का एमओयू साइन किया था। जिनमें से अब तक 400 करोड़ से अधिक के काम हो चुके हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष कुशपुरी का कहना है कि उद्योगों के प्रति सरकार की सोच में बदलाव आया है। उद्योग बढ़ रहे हैं। उद्यमी भीमसेन कंसल का कहना है कि अब राहत है।
पांच साल बजट को तरसता रहा औद्योगिक क्षेत्र
शामली। कंडेला स्थित औद्योगिक क्षेत्र को 1983 में स्थापित किया गया था। इसमें करीब 130 औद्योगिक इकाइयां हैं, जबकि जिले में करीब 200 हैं। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या पानी निकासी की है। यहां की सड़कें भी जर्जर हो चुकी हैं। उद्यमी अंकित गोयल कहते हैं कि सालों से औद्योगिक क्षेत्र उपेक्षित है। पांच साल काफी प्रयास करने के बाद कुछ बजट मिला। हाल ही में प्रदेश सरकार से मिले 6.80 करोड़ के बजट से कुछ उम्मीद जगी है। उद्यमी अनुराग जैन कहते हैं कि औद्योगिक क्षेत्र में विकास के लिए काफी काम करने की जरूरत है।
मेरठ में इंडस्ट्री लगाने का स्कोप बढ़ाया जाए, ताकि युवा उद्यमी जब उद्योग लगाए तो अनुमतियां लेने के चक्कर में उसका मनोबल न टूटे। -पंकज गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष उप्र आईआईए
24 घंटे बिजली मिले, फायर विभाग से एनओसी की प्रक्रिया सरल हो। पश्चिम बंगाल, आसाम, कानपुर, लखनऊ, तमिलनाडु की कनेक्टिविटी बढ़े। - विभोर अग्रवाल, अध्यक्ष एमएमए
उद्यमी अपनी पूरी जिंदगी लगाकर देश को विकास के पथ पर ले जाता है। लेकिन जब उसकी कार्यक्षमता खत्म हो जाती है, तो जीवन बड़ा कठिन हो जाता है। ऐसे में सरकार उद्यमियों के लिए पेंशन योजना लागू करे।
-सुनीश वैश्य, राष्ट्रीय अध्यक्ष आईआईए