मायावती पहली बार साल 1994 में राज्यसभा सांसद बनीं। इसके बाद 1995 में गठबंधन की सरकार बनाते हुए मुख्यमंत्री बनीं। उस समय तक मायावती राज्य की सबसे कम उम्र में बनने वाली मुख्यमंत्री थीं। बिजनौर जिले से मायावती का पुराना नाता रहा है। 1989 में मायावती राजनीति में पहली बार बिजनौर लोकसभा सीट से सांसद बनी थीं।
कैराना से लड़ा पहला लोकसभा चुनाव
मायावती ने अपना पहला चुनाव साल 1984 में उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा सीट से लड़ा था। इसके बाद दूसरी बार साल 1985 में उन्होंने बिजनौर और फिर 1987 में हरिद्वार से चुनाव लड़ा। साल 1989 में मायावती को बिजनौर से जीत हासिल हुई। मायावती को कुल 183,189 वोट मिले थे और हार जीत का अंतर 8,879 वोटों का था।
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 1985 में तब बिजनौर की सुरक्षित सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था। इस चुनाव मैदान में पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार कांग्रेस से व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान लोकदल से चुनाव लडे़ थे। मीरा कुमार यह चुनाव जीत गई थीं। मीरा कुमार को 128,086 व राम विलास पासवान को 122,747 और मायावती को 61,504 वोट मिले थे। मायावती अपने जीवन का पहला चुनाव लड़ी थीं। 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में मायावती फिर से बिजनौर लोकसभा से चुनाव लड़ीं और पहली बार सांसद बनीं। उस समय सपा का बसपा के साथ गठबंधन था। लेकिन 1991 के चुनाव में दोनों दल अलग हो चुके थे और वह मुलायम सिंह यादव के दांव की वजह से संसद में जाने से रह गई थीं। अब सवाल यह है कि क्या मायावती लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव के लिए प्रचार करेंगी?
1991 में प्रधानमंत्री चंद्रशेखर थे व मुलायम सिंह यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे। दोनों एक ही दल समाजवादी जनता पार्टी में थे। लोकसभा के मध्यावधि चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने सीपीएम के साथ गठबंधन कर लिया और मास्टर रामस्वरूप को मैदान में उतार दिया था। मायावती को 1,59,731 वोट मिले थे, जबकि रामस्वरूप को 57,880 वोट मिले थे। इस चुनाव में जनता दल से भाजपा में आए मंगलराम ने जीत दर्ज की और उन्हें 2,47,465 वोट मिले थे। सभी को लगता था कि मायावती सीट बचा लेंगी, लेकिन मुलायम सिंह यादव ने बिजनौर सीट पर रामस्वरूप के लिए प्रचार कराया।
सहारनपुर ऐसा लोकसभा चुनाव क्षेत्र है, जहां 1998 में बसपा प्रमुख कांशीराम भी भाग्य आजमा चुके। लेकिन तब सपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रसीद मसूद की मौजूदगी के कारण भाजपा के चौधरी नकली सिंह विजय हुए थे। लोकसभा चुनाव में सहारनपुर सीट पर वह भाजपा की दूसरी जीत थी। 1996 में नकली सिंह ने रसीद मसूद को पराजित कर इतिहास में पहली बार भाजपा का सहारनपुर सीट पर खाता खोला था। मायावती खुद सहारनपुर जिले की हरोड़ा सीट पर दो बार चुनाव लड़कर जीत चुकी हैं।
आपको बता दें कि दलित मुद्दे पर आंदोलन और हिंसा को लेकर चर्चा में रही सहारनपुर और मेरठ सीट बीएसपी के खाते में गई है। यूपी में योगी सरकार बनने के बाद सहारनपुर में हिंसा हुई। इसके बाद ही सहारनपुर सीट चर्चा में आई थी। इस हिंसा में दलित उत्पीड़न का आरोप लगाकर बीएसपी प्रमुख मायावती ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था और इसके बाद वह सहारनपुर पहुंच गई थीं। इस दौरान मायावती ने बीजेपी पर खुद की हत्या कराने तक की साजिश रचने का आरोप लगा दिया था।
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