वोट डालने के लिए लाइन में लगी महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में कहीं भाजपा का कमल का खिलता दिखा तो कहीं बसपा के हाथी की दहाड़ सुनाई दी। कांग्रेस का हाथ का पंजा चांदपुर विधान सभा में एक दो गांव को छोड़कर पिछड़ता नजर आया। जातीय समीकरणों के गणित में उलझी इस सीट पर भाजपा और बसपा के बीच कांटे की टक्कर रही।
सुबह सात बजे से 11 बजे तक मतदाताओं ने तेजी के साथ मतदान किया। उसके बाद धीमी गति से मतदान होता रहा। सुबह से लेकर शाम तक हर बूथ पर भाजपा व बसपा में मुकाबला नजर आया। मुस्लिम, गुर्जर व अनुसूचित बहुल बूथों पर हाथी चिंघाड़ रहा था। अन्य बिरादरियों के बूथों पर भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण हो रहा था।
कांग्रेस प्रत्याशी नसीमुद्दीन सिद्दीकी का जलवा चुनाव में दिखाई नहीं दिया। चांदपुर विधानसभा में पूर्व विधायक इकबाल ठेकेदार के आसपास के तीन चार गांवों में कांग्रेस को मुस्लिम वोट जाता दिखाई दिया। कई गांवों में तो कांग्रेस प्रत्याशी के एजेंट तक नहीं थे। जाट बहुल गांव स्वाहेड़ी, सालमाबाद, गढ़ी, मंडावली, कस्बा झालू सहित कई गांवों में बसपा प्रत्याशी सेंध लगाते नजर आए। जातीय समीकरण पूरी तरह से हावी होते नजर आए। चुनाव में कुल 13 प्रत्याशी मैदान में थे। लेकिन मुकाबले में केवल भाजपा के सांसद भारतेंद्र सिंह व बसपा के मलूक नागर ही रहे। कांग्रेस को छोड़कर बाकी प्रत्याशियों के बस्ते तक कहीं नजर नहीं आए।
बिजनौर लोकसभा की दो विधान सभा सीटें पुरकाजी और मीरापुर मुजफ्फरनगर में हैं। यहां भी मुकाबला भाजपा और बसपा के बीच ही नजर आया। कुछ मतदाताओं में इस बात की भी नाराजगी थी कि कांग्रेस प्रत्याशी उनके यहां तो वोट मांगने तक नहीं आए। गुर्जर बहुल गांव मीरापुर के शिवपुरी, सिकरेड़ा, जमालपुर, देवल और कैलापुर में हाथी की चाल तेज रही। हालांकि कुछ बूथों पर भाजपा भी सेंधमारी करती दिखी।
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