भाजपा की बात करें तो इस सीट पर पिछले दो चुनावों से राजेंद्र अग्रवाल जीतते रहे हैं। चर्चा है कि चाहे राजेंद्र अग्रवाल का टिकट बरकरार रहे या फिर किसी अन्य को टिकट दिया जाए। लेकिन इस बार भी भाजपा वैश्य उम्मीदवार को ही मैदान में उतारने की तैयारी में है। ऐसे में हरेंद्र अग्रवाल का चुनावी मैदान में आना भाजपा की परेशानी बढ़ा सकता है। चूंकि दो वैश्य उम्मीदवार होने से वैश्य मतों का विभाजन होने के प्रबल समीकरण बन जाते हैं।
पूर्व सीएम के पुत्र हैं हरेंद्र
हरेंद्र अग्रवाल उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास गुप्ता के पुत्र हैं। मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले हरेंद्र अग्रवाल एमएलसी भी रह चुके हैं और इस समय गाजियाबाद में रहते हैं। मेरठ में विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति रहती है।
ओपी शर्मा ने खरीद लिया था पर्चा
पहले चरण के मतदान के लिए सोमवार से पर्चा वितरण का काम शुरू हुआ था। कांग्रेस से प्रत्याशी घोषित किए गए डॉ. ओमप्रकाश शर्मा एडवोकेट ने पहले ही दिन पर्चा भी खरीद लिया था। लेकिन देर रात निर्णय बदल दिया गया।
ओपी शर्मा को टिकट देकर कांग्रेस पहले बेहतर परिणामों की उम्मीद कर रही थी। लेकिन वैश्य मतों के गणित को देखते हुए इस सीट पर प्रत्याशी बदलने का फैसला लिया गया। यानी अब साफ है कि इस सीट पर कांग्रेस ब्राहम्ण कार्ड नहीं बल्कि वैश्य कार्ड खेलना चाहती है और भाजपा को सीधे सीधे निशाना बना रही है।
गौरतलब है कि 18 लाख वोटरों से ज्यादा की मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर लगभग सवा दो लाख वैश्य मतदाता बताए जाते हैं। यह भी भाजपा की जीत का प्रबल आधार बनते रहे हैं। अब इनमें कांग्रेस की सेंध सीधी भाजपा को चोट पहुंचा सकती है। उधर, गठबंधन को इस टिकट से राहत मिल सकती है।