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मिशन 2019: ध्रुवीकरण की आस पर टिका चुनावी गणित, महत्वपूर्ण है पश्चिमी यूपी की यह सीट

Mon, 01 Apr 2019 03:28 PM IST
कपिल kapil आनंद प्रकाश, अमर उजाला, सहारनपुर
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भाजपा प्रत्याशी राघव लखन पाल, कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद और बसपा प्रत्याशी फजलुर्रहमान - फोटो : अमर उजाला
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प्राचीन मां शाकंभरी सिद्धपीठ, इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद और वुड कार्विंग उद्योग से सहारनपुर की पहचान दुनियाभर में है। आजादी के बाद से 1971 तक और फिर 1984 में इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। यहां एक बार जनता पार्टी, तीन-तीन बार जनता दल व भाजपा, दो बार बसपा और एक बार सपा का भी कब्जा रहा है। यहां से 1998 में कांशीराम भी बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे, तब वे भाजपा के नकली सिंह से हार गए थे। इस बार भाजपा के राघव लखनपाल, कांग्रेस के इमरान मसूद, बसपा के फजलुरर्हमान और आप के योगेश दाहिया चुनाव मैदान में है। राघव लखनपाल शर्मा 2014 की मोदी लहर में भी जीते थे। इस बार सपा, बसपा और रालोद के बीच गठबंधन है। मतदाताओं के बीच लामबंदी और ध्रुवीकरण की कोशिश हो रही है। गठबंधन और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच खुद को भाजपा से मुकाबले में खड़ा करने की होड़ है। ध्रुवीकरण की आस भाजपा प्रत्याशी को भी है। राष्ट्रीय मुद्दों के साथ स्थानीय मुद्दों को भी उठाया जा रहा है। 

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गांव नंदी के बाहर खेत में काम कर रहे मोहम्मद इनाम कहते हैं कि नेता वोट मांगने आ रहे हैं, तमाम वादे कर रहे हैं, पर हम तो वोट उसी को देंगे जो किसानों की बात करेगा। गांव में प्रदीप नंबरदार के बरामदे में बैठे संदीप एडवोकेट कहते हैं कि अपराधों पर, सर्जिकल स्ट्राइक व एयर स्ट्राइक करके पाकिस्तान और आतंकियों को करारा जवाब दिया गया है। प्रदीप नंबरदार कहते हैं कि किसानों का हाल भी देख लो। गन्ना मूल्य मिल नहीं रहा, बिजली की दरें इतनी हो गई कि भुगतान करना किसान के बस में नहीं है। नागल मार्ग पर गांव पंडोली में ट्यूबवेल पर पेड़ की छांव में चारपाई पर बैठे किसान आरिफ, इस्लाम और नसीब कहते हैं कि जाति धर्म के नाम पर लोगों को बांटना गलत है, सबके प्रति समान विचार रखना चाहिए। चुनाव के जिक्र पर कहते हैं कि अभी अभी चुप हैं, माहौल देख रहे हैं, जो जीत की तरफ दिखेगा, उसी को वोट देंगे।

गांव फिरोजपुर में निर्माणाधीन बाईपास नजदीक मकान बनवा रहे चौधरी काला सिंह और किसान सीताराम का तर्क है कि अपराधियों पर कार्रवाई हुई, खौफ कम हुआ है। मकान बना रहे श्रमिक ओमकार उपाध्याय भी सरकार की नीतियों की तरफदारी करते हैं। गांव लाखनौर में दुकान के बाहर बैठे अनुसूचित जाति वर्ग के लोग कहते हैं कि हम तो वहीं हैं, जहां लोग हमें मानते हैं, उसमें कोई शक नहीं है।

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शहर का अलग ही है मिजाज
हकीकतनगर के रामलीला मैदान पर युवा चर्चा कर रहे हैं। हकीकतनगर निवासी विक्की पाहवा कहते हैं कि भाजपा की सरकार में अहम फैसले हुए, सेना का मनोबल बढ़ा। आवास विकास निवासी चंद्रमोहन त्यागी कहते हैं कि बिजली आपूर्ति बढ़ी, अपराध खत्म हुआ। अमित सेठी, दीपक दहिया और प्रभात शर्मा कहते हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक से देश का मान बढ़ा है। राष्ट्रवाद के नाम पर वह वोट करेंगे। शहर के रायवाला बाजार में खरीदारी करने आई मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक का मुद्दा उठाने के लिए भाजपा की तारीफ करती है, लेकिन वोट अपने विवेक से देने की बात कहती हैं। खाता खेड़ी में वुड कार्विंग की दुकान पर डाइनिंग टेबल तैयार कर रहे अब्दुल कादिर, इकबाल और वसीम कहते हैं कि हम उसके साथ हैं, जो हमारा साथ देता है।

अहम मुद्दे
वुड कार्विंग उद्योग को बढ़ावा मिले, लकड़ी डिपो की स्थापना, दिल्ली सहारनपुर हाईवे का निर्माण, यूनिवर्सिटी की स्थापना, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, गन्ना मूल्य भुगतान, बिजली की बढ़ी दरें आम आदमी से जुड़ा मुद्दा हैं।

मतदान प्रतिशत करेगा फैसला
लोकसभा क्षेत्र सहारनपुर में सहारनपुर नगर, सहारनपुर देहात, बेहट, देवबंद और रामपुर मनिहारान शामिल हैं। सर्वाधिक मतदाता 4,04,409 सहारनपुर नगर विधानसभा क्षेत्र में हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में 73.43 प्रतिशत मतदान सहारनपुर लोकसभा सीट पर हुआ था। इस बार मतदान प्रतिशत कितना रहता है, यह भी हार जीत का आंकड़ा तय करेगा।
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सहारनपुर से अब तक चुने गए सांसद
 1952      अजित प्रसाद जैन,    कांग्रेस
 1957       सुंदरलाल                   कांग्रेस 
 1957       अजित प्रसाद जैन,     कांग्रेस
 1962     सुंदरलाल,                 कांग्रेस
 1967      सुंदरलाल,                  कांग्रेस
 1971      सुंदरलाल,                 कांग्रेस
 1977      रशीद मसूद                 जनता पार्टी
 1980     रशीद मसूद                 जनता दल 
                                              (सेक्युलर)
 1984     चौधरी यशपाल सिंह    कांग्रेस
 1989     रशीद मसूद                 जनता दल
 1991    रशीद मसूद                 जनता दल
 1996    नकली सिंह                 भाजपा
 1998     नकली सिंह                 भाजपा
 1999    मंसूर अली खान    बसपा
 2004    रशीद मसूद                 सपा
 2009    जगदीश राणा                 बसपा
 2014    राघव लखनपाल    भाजपा

इस बार मतदाताओं की संख्या 
वोटरों की संख्या   17,22,580
महिला वोटर        8,00,393
पुरुष वोटर          9,22,046
थर्ड जेंडर            141

क्या कहता है देवबंद
विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद के गेट के सामने मोहम्मद फैजान की चाय की दुकान पर बैठे मोहम्मद नसीम, अब्दुल हफीज, आदिल, मोहम्मद फारुख, इस्लाम और शहजाद के अपने अपने तर्क हैं। स्थानीय स्तर पर इनकी च्वाइस भी अलग-अलग है। राजनीतिक दलों की पैंतरेबाजी भी समझ रहे हैं, किसे वोट देना है मन बना लिया है, लेकिन पत्ते नहीं खोल रहे हैं। इनका कहना है कि अभी सात अप्रैल को देवबंद में सपा, बसपा, रालोद गठबंधन की साझा रैली होगी, जिसके बाद सियासी समीकरण बदलेंगे।

जातीय समीकरण
इस सीट पर कुल 17,22,580 मतदाताओं में सर्वाधिक मुस्लिम करीब छह लाख हैं। दूसरे नंबर पर करीब तीन लाख वोटर अनुसूचित जाति वर्ग के हैं। इसके अलावा गुर्जर करीब डेढ़ लाख, पंजाबी और सिख करीब पौने दो लाख, वैश्य करीब एक लाख के अलावा सैनी, कश्यप, जाट सहित अन्य जातियों के वोटर हैं। मुस्लिम वोटरों पर कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद और गठबंधन से प्रत्याशी हाजी फजलुर्रहमान दावा कर रहे है, मुस्लिमों में भी कुरैशी, तेली, गाड़ा, शेख और अन्य बिरादरियों के मतदाता हैं। बिरादरियों के मुताबिक नेता अपने समीकरण साध रहे हैं। परिणाम का दारोमदार इसी पर टिका है कि मुस्लिम परंपरानुसार किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में जाएगा या बंटेगा।

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