समय समय पर यहां से देश दुनिया के लिए संदेश दिए जाते रहे हैं। यह बात अलग है कि दारुल उलूम की तरफ से किसी के समर्थन की घोषणा नहीं की जाती है। गाहे बगाहे पहले भी सियासी लोग यहां आकर अपने लिए समर्थन मांगते रहे हैं।
पूर्व में मुलायम सिंह यादव ने भी 2009 में देवबंद पहुंचकर दारुल उलूम के मोहतमिम से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया था। राहुल गांधी भी उससे पहले यहां आ चुके हैं। देवबंद की सरजमीं की अहमियत पर भी गठबंधन की निगाहें हैं।
दरअसल, मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगे के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन जिलों में दो समुदाय के लोगों के बीच खाई बन गई थी, जिस कारण गैर भाजपा दलों का जातीय समीकरण भी गड़बड़ा गया था। अब देवबंद से रैली की शुरुआत करके उसी पुराने जातीय समीकरण को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।
सहारनपुर जनपद की सीमा एक तरफ मुजफ्फरनगर, तो दूसरी तरफ शामली जनपद से जुड़ी हुई हैं। इन तीनों जनपदों की देवबंद से नजदीकी है। देवबंद में संयुक्त चुनावी रैली करने के पीछे सहारनपुर के साथ ही कैराना और मुजफ्फरनगर को भी साधने की कोशिश गठबंधन की होगी।
बिजनौर से इकबाल, नगीना से गिरीश बसपा के प्रत्याशी
बिजनौर। बसपा ने बिजनौर लोकसभा सीट से चांदपुर के पूर्व विधायक इकबाल ठेकेदार व नगीना सीट से गिरीशचंद्र पर दांव खेला है। गिरीशचंद्र 2014 में भी नगीना सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। तब उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। जिले की दोनों लोकसभा सीटें बसपा के खाते में गई। सपा की पूर्व विधायक रुचि वीरा पाला बदलकर बसपा में शामिल हो गईं थी। उन्हें बिजनौर लोकसभा का बसपा का प्रभारी बना दिया गया था।
अनुसूचित जाति के लोगों के विरोध करने पर रुचि वीरा को बिजनौर लोकसभा के पद से हटा दिया गया था। चांदपुर क्षेत्र के पूर्व विधायक इकबाल ठेकेदार को बिजनौर लोकसभा का प्रभारी बना दिया गया।
इकबाल ठेकेदार को टिकट दिलाने की मुरादाबाद, मेरठ व सहारनपुर के जोन इंचार्ज शमशुद्दीन राइन पैरवी कर रहे थे। बाकी दावेदार शमशुद्दीन राइन की काट नहीं ढूंढ पाए। नगीना सीट पर गिरीशचंद्र को बसपा ने लोकसभा प्रभारी बना रखा था। उनका टिकट शुरू से ही पक्का माना जा रहा था।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/