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मिशन 2019: होली की सियासी तरंग, टिकट मिले तो चढ़े असली रंग, अब इंतहा हो गई इंतजार की

Wed, 20 Mar 2019 10:50 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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नेताजी की होली
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इस बार की होली कुछ अलग है। लोकसभा चुनाव के शंखनाद के बीच होली का रंग तब कुछ ज्यादा निखरेगा जब नेताजी का टिकट फाइनल हो जाएगा। अभी तो सांस टिकट की आस में ही अटकी है और दिल्ली के चक्कर लगाकर दिमाग चकरघिन्नी हो गया है। टिकट मिले तो कुछ बात बने।

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होली इस बार राजनीतिक रंग में सराबोर है। आम जनता तो उम्मीद कुछ और ही लगा रही थी। लेकिन सारे अरमान बेचारे नेताजी की दिल्ली परिक्रमा में ही धुल गए। होली आ गई और कांग्रेस को छोड़कर अन्य प्रमुख दलों के टिकट ही घोषित नहीं हुए। ऐसे में भावी उम्मीदवारों की सारी तैयारियां धरी की धरी ही रह गई। तैयारी तो की है। लेकिन खुलकर इस का इजहार नहीं कर सकते। कहीं टिकट न मिला तो मजाक ही न बनकर रह जाए। हालांकि नेताओं ने अपने चेलों की टीम लगाई है कि छोटे-छोटे कार्यक्रम जनता के बीच कर डालो। बधाई दे डालो ताकि उन्हें यह न लगे कि वैसे चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं और होली पर याद तक नहीं किया।

.....इंतहा हो गई इंतजार की
भाजपा में कौन चुनावी रण में होगा, इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। किसी को टिकट बचाने की चिंता है तो किसी को टिकट पाने की। रोज उठा पटक हो रही है और रात तक आते-आते यह शोर भी मचता है कि देर रात तक सूची आ सकती है। ऐसे में बेचारे दावेदारों की नींद भी उड़ जाती है। यही गुनगुना रहे हैं कि इंतहा हो गई इंतजार की। बसपा ने मेरठ से यूं तो याकूब कुरैशी को लोकसभा प्रभारी घोषित कर रखा है और यह तय माना जा रहा है कि चुनाव भी ये ही लड़ेंगे। लेकिन विधिवत घोषणा अब तक नहीं हुई है। ऐसे में फाल्गुनी बयार में चर्चा किसी भी रंग की उड़ ही जाती है।

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भंग और शराब से होली का रंग
होली का त्यौहार हो और ऊपर से चुनाव। ऐसे में भंग की तरंग और शराब की खुमारी तारी न हो, भला ऐसा हो सकता है क्या? होली आयोजन में इसका पुख्ता इंतजाम किया गया है। विभिन्न आयोजनों में इसकी पूरी व्यवस्था है। दो दिन के इस धमाल में वोटों के पूरे गणित पर अलग ही अंदाज में चर्चा रहेगी।

मोदी मुखौटा, प्रियंका टी शर्ट
होली की पूरी किट बाजार में मौजूद है। मानों रंगों की बौछार से ही हुलियारे एक-दूसरे दल को ध्वस्त कर देंगे। कहीं मोदी मुखौटे बाजार में छाए हैं तो कहीं प्रियंका टीशर्ट। केजरीवाल पिचकारी भी खूब इठला रही है। यहां तक कि पिचकारियों के साइज के आकार पर नेताओं का नाम रखने की कोशिश की गई है। 

......चंदा है तू
जहां एक ओर नेताजी टिकट न मिलने से परेशान हैं तो वहीं जनता जनार्दन मजे लेने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है। जो भी दावेदार हैं, उनसे फोन कर पूछा जा रहा है कि भाई साहब! क्या हुआ? इंतजार करो का जवाब आने पर फिर इधर से चुनावी शॉट मारा जाता है। लेकिन भाई साहब नाम तो आपका सबसे ऊपर चल रहा है। बच्चे-बच्चे की जुबान पर आपका ही नाम है। इधर, नेताजी फूलकर कुप्पा हुए और उधर तपाक से शॉट आया। होली का कॉलोनी में प्रोग्राम रखा है। वो दूसरे कह रहे थे, मगर हमने साफ कह दिया कि भाई साहब ही आएंगे। हां हां। और नेताजी ने भी मुरझाए चेहरे और दिल पर हाथ रखकर कहा बढ़िया किया। मेरी तरफ से 11 हजार के चंदे की पर्ची काट देना।

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