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लोकसभा चुनाव 2019: मुजफ्फरनगर और बागपत पर सबकी निगाहें, दोनों ही सीट पर कांटे का मुकाबला

Wed, 10 Apr 2019 03:38 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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अजित सिंह, संजीव बालियान - फोटो : अमर उजाला
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पहले चरण की आठ सीटों में हो रहे चुनाव में सबसे बड़ी चुनावी लड़ाई मुजफ्फरनगर और बागपत सीट पर है। इन पर देशभर की निगाहें लगी हैं। रालोद अध्यक्ष चौ. अजित सिंह मुजफ्फरनगर से पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। यहां उनका मुकाबला पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान से है। जयंत चौधरी बागपत से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां इनका मुकाबला केंद्रीय मंत्री डाॅ. सत्यपाल सिंह है।     

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मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट -अजित और बालियान में कांटे का मुकाबला
मुजफ्फरनगर। इस सीट पर देश की सियासी निगाहें लगी हैं। गठबंधन प्रत्याशी रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और मौजूदा सांसद डॉ. संजीव बालियान के बीच सीधी टक्कर है। यहां दोनों ही प्रत्याशी जाट हैं और कांग्रेस ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। चुनाव में हार-जीत से ही जाट राजनीति की दिशा भी तय होगी। मतदाताओं ने खामोशी अख्तियार कर रखी है। विकास का मुद्दा और जन समस्याएं चुनाव में गौण हो गई हैं, जातीय समीकरणों पर जीत का दांव लगा है।

एससी-मुस्लिम-जाट  गणित का सहारा
सपा-बसपा गठबंधन व एससी, मुस्लिम और जाट वोटरों का गणित, इसके भरोसे रालोद के अजित सिंह पहली बार मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव मैदान में हैं। मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण चौधरी अजित सिंह की दिखाई दे रहा है। बसपा सुप्रीमो मायावती की देवबंद रैली में एससी वोटरों को भी लामबंद करने का प्रयास किया गया था। लेकिन अजित सिंह की बड़ी चुनौती जाट वोटरों में बिखराव रोकना है।

बीते लोकसभा चुनाव में दंगे के बाद बदले माहौल में जाटों ने भाजपा के हक में वोट किया था। चौधरी अजित सिंह कहते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी के झूठ और जुमलों से त्रस्त जनता गठबंधन के पक्ष में वोट करेगी। उन्हें सर्वसमाज का वोट मिलेगा। 

मोदी के काम, योगी के  सुशासन का आसरा
2014 के चुनाव में भाजपा के डॉक्टर संजीव बालियान रिकार्ड चार लाख मतों के अंतर से जीते थे। दंगे का असर और मोदी लहर जीत की बड़ी वजह बनी थी। इस बार संजीव पांच साल के विकास कार्यों और जनता से सीधे संपर्कों का हवाला देकर मैदान में हैं। आरएसएस और पार्टी संगठन का बेड़ा वोटरों के बीच सक्रिय है। सवर्ण और अति पिछड़ी जातियाें को भाजपा अपनी ताकत मान रही है। एससी में वाल्मीकि, खटीक, कोरी, हिंदू धोबी आदि से भी उम्मीद है।

पीएम और सीएम अपनी चुनावी सभाओं में दंगे का जिक्र कर ध्रुवीकरण को हवा देने की कवायद कर चुके हैं। बालियान का कहना है कि पांच साल जनता की सेवा में लगाए हैं। पीएम मोदी के काम और सीएम योगी के सुशासन के लिए जनता भाजपा को ही चुनेगी।

मुजफ्फरनगर में जीत के समीकरण
 जाट         1,60,000
 गुर्जर         57,000
 मुस्लिम       5,25,000
 एससी    2,10,000
 सवर्ण        3,90,000
 अन्य       4,50,000

2014 लोकसभा चुनाव का हाल
प्रत्याशी पार्टी  मिले वोट
संजीव बालियान भाजपा     6,53,391
कादिर राना बसपा    2,52,241
वीरेंद्र सिंह   सपा    1,60,810
पंकज अग्रवाल कांग्रेस  12,937

इस सीट की विधानसभाएं
मुजफ्फरनगर शहर, बुढ़ाना, जानसठ, चरथावल, सरधना

बागपत लोकसभा सीट -जयंत और डॉ. सत्यपाल सिंह में कड़ा संघर्ष
इस सीट पर केंद्रीय मंत्री डाक्टर सत्यपाल सिंह और रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच सीधा मुकाबला है। सियासी संग्राम के आखिरी पड़ाव तक आते-आते दोनों दलों के बीच हार-जीत का गणित उलझता नजर आ रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का नाम लेकर भाजपा और रालोद ने मतदाताओं को लुभाने की पुरजोर कोशिश की है। देखने वाली बात यह होगी कि 11 अप्रैल को जनता किसके मन की बात करती है।

मोदी मैजिक, राष्ट्रवाद, विकास के सहारे सत्यपाल
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री एवं भाजपा प्रत्याशी डॉ. सत्यपाल सिंह बागपत सीट से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। वह पिछले पांच साल में कराए गए विकास कार्यों को मुद्दा बना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि से भी उन्हें बड़ी उम्मीद है। पुलवामा  अटैक के बाद एयर स्ट्राइक से आतंकियों को दिए गए जवाब के बाद जागी राष्ट्रवाद की भावना से भी उन्हें आशा है।

पिछले लोकसभा, विधानसभा और निकाय चुनाव में जाट वोट बैंक का बड़ा हिस्सा भाजपा के पाले में खड़ा होकर चुनाव का रुख पलटता रहा है। देखने वाली बात यह होगी कि इस बार जाट और अनुसूचित जाति के वोट भाजपा को कितने मिल पाते हैं। भाजपा का सारा गणित इन्हीं वोटों में बंटवारे पर टिका है। 
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गठबंधन के समीकरण पर सवार जयंत चौधरी
रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी पहली बार बागपत संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले उनके पिता चौधरी अजित सिंह छह बार बागपत से सांसद रह चुके हैं। चुनाव प्रचार में जयंत गठबंधन के समीकरण के साथ जनता के बीच गए। उन्हें मुस्लिम, जाट और एससी के साथ आने की उम्मीद है।

भाजपा भी जाट और एससी वोटों में सेंधमारी की पुरजोर कोशिश कर रही है। रालोद के लिए सबसे बड़ी चुनौती जाट और एससी वोटों का भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण होने से रोकना है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पौत्र जयंत चौधरी के पास भावनात्मक लगाव का कवच भी माना जा रहा है।

बागपत में जीत  के समीकरण
 जाट         4,35,000
 गुर्जर         73,000
 मुस्लिम       3,00,000
 एससी    2,15,000
 सवर्ण        3,00,000
 अन्य       3,15,000

2014 लोकसभा चुनाव का हाल
प्रत्याशी    पार्टी मिले वोट
सत्यपाल सिंह   भाजपा 4,23475
गुलाम मोहम्मद  सपा   213609
अजित सिंह    रालोद 199516
प्रशांत चौधरी    बसपा   141743

इस सीट की विधानसभाएं
बागपत, बड़ौत, सिवालखास, छपरौली, मोदीनगर

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