पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान की किस्मत क्या फिर से चमकेगी, क्योंकि पिछले चुनाव में दंगे के ध्रुवीकरण और मोदी लहर ने उन्हें राजनीति के नए मुकाम पर पहुंचाया था। पहली बार टिकट मिलने पर सांसद ही नहीं बनें, बल्कि मोदी मंत्रिमंडल में भी जगह पाई। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह की चुनौती को उन्होंने बखूबी समझा और चुनावी मुकाबला किया। डॉ. बालियान यदि जीतने में सफल हुए तो वह जिले से लगातार दूसरी बार चुने जाने वाले तीसरे सांसद होंगे। कांग्रेस के सुमत प्रसाद जैन वर्ष 1957, 1962 और भाजपा के सोहनवीर सिंह वर्ष 1996, 1998 में इस सीट से लगातार दो बार चुनाव जीते थे। चुनावी परिणाम पश्चिमी यूपी में जाट राजनीति की दिशा भी मुकर्रर करेगा। चौधरी अजित सिंह और डॉ. संजीव बालियान में से कौन जाट राजनीति का सिरमौर बनेगा ? वैसे भी रालोद की अग्नि परीक्षा की घड़ी है। वर्ष 2014 में रालोद का लोकसभा में खाता भी नहीं खुला था। गठबंधन के सहारे मुजफ्फरनगर, बागपत और मथुरा सीटों पर क्या रालोद कामयाब हो पाएगी? ऐसे ही तमाम सवालों पर अवाम का फैसला सामने आएगा।
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