जिलाधिकारी ने सभी नागरिकों को निर्देशित किया कि अपने घरों की खिड़की, दरवाजे टिड्डी दल का आक्रमण होने पर बंद कर रखें। घरों में घुसने के बाद टिड्डी को बाहर निकालना मुश्किल होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, 2 से 2.5 इंच के आकार की टिड्डी कीट 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 1 दिन में 150 किमी तक उड़ने की क्षमता रखता है। टिड्डी हरी पत्तियां, फूल, फसल के बीज आदि खा जाती हैं।
नियंत्रण के उपाय
- आक्रमण होने पर पटाखे, ढोल, नगाड़ा, थाली, डीजे बजाकर और शोर मचाकर टिड्डी को खेत अथवा पेड़ पौधों पर बैठने न दिया जाए।
- खेत किनारे पर गहरी नालियां बनाएं, इनमें गिरने वाले इस कीट के शिशु, निंफ को मिट्टी में दबा दें। लाइट ट्रैप का प्रयोग कर तीनों को नष्ट किया जाए।
- टिड्डी दल शाम को 5 से 7 बजे के आसपास जमीन पर बैठ जाता है। सुबह 8 से 9 बजे के करीब उड़ान भरता है। बैठने की अवधि में इनके ऊपर कीटनाशकों का छिड़काव करें।
रासायनिक उपचार
- इस कीट के उपचार हेतु मेलाथियान 96 प्रतिशत का छिड़काव करना चाहिए।
- क्लोरोपाइरीफोस 20 प्रतिशत ईसी की डेढ़ लीटर मात्रा या क्लोरोपाइरीफोस 50 प्रतिशत प्लस साइपरमेथ्रिन 5 फीसदी की 500 एमएल मात्रा या लेमड़ासायहेलोथरीन 5 फीसदी की 500 एमएल मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
- मेलाथियान 5 फीसदी धूल या फेनवेनरेट 0.5 फीसदी धूल 25 किलोग्राम अथवा क्लोरोपाइरीफोस 10 फीसदी धूल 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से डस्टिंग कराई जाए।