काम बंद हुआ तो अपने गांव की और निकल पड़े श्रमिक
- फोटो : अमर उजाला
कोराना संक्रमण काल के दौरान श्रमिकों को काफी विपरीत हालात से जूझना पड़ रहा है। श्रमिकों ने कहा कि फैक्टरी बंद हो गई थी। जो जमा था चार पांच दिन खा लिया। अब ना काम था ना जेब में रुपये। घर आने का कोई साधन नहीं था क्या करते। झोला कंधे पर डाला और गांव की ओर चल दिए।
शामली से होकर गुजर रहे बिहार, बलिया और बदायूं के मजदूरों ने कुछ इसी तरह अपनी आपबीती सुनाई। शहर में सुबह करीब साढ़े आठ बजे बुढ़ाना रोड पर 15 लोग पैदल जाते हुए मिले। इनमें किसी के कंधे पर बैग लटका था तो कोई सिर पर बैग लेकर जा रहे थे। इनसे बातचीत की तो उनका कहना था कि वे राजस्थान के हनुमानगढ़ी में फैक्टरी में काम करते थे। लॉकडाउन में फैक्टरी बंद हो गई। उनके पास जो कुछ पैसे थे, वे खर्च हो गए। बुढ़ाना रोड पर रेलवे फाटक के निकट पैदल जा रहे दिव्यांग सहदेव पासवान और तीन बच्चे भी थी।
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उन्होंने बताया कि वे बिहार के रहने वाले हैं और करनाल में फैक्टरी में काम करते थे। तीन दिन पहले घर जाने के लिए पैदल निकले थे, लेकिन कहीं पर कोई बस या साधन नहीं मिला। इसी तरह करनाल रोड पर पैदल जा रहे छह लोगों ने बताया कि वे पंजाब के लुधियाना में फैक्टरी में काम करते थे। राशन और पैसे खत्म हो गए। खाने के लाले पड़े तो छह दिन पहले घर के लिए पैदल ही निकल लिए थे।
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