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पूरे देश के लघु सीमांत किसानों का होना चाहिए कर्ज माफ : केसी त्यागी

Sun, 11 Jun 2017 02:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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फसलों का वाजिब दाम न मिलने और कर्जदार होने के कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं। किसानों के अधिकार के लिए आयोग का गठन होना चाहिए। उसे राष्ट्रीय आयोग की तर्ज पर संवैधानिक दर्जा प्राप्त हो। मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन चल रहा है। बागपत जनपद के मंडोला में भी भूमि अधिग्रहण नीति को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों पर पुलिस ने बर्बरता पूर्वक कार्रवाई की। महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। यदि सरकार दो दिन के भीतर किसानों को न्याय नहीं देती है तो विपक्ष के नेताओं का एक उच्चस्तरीय दल मंडोला पहुंचकर किसानों की समस्या सुनेगा। यह बात जनता दल यू के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्य सभा सदस्य केसी त्यागी ने शनिवार को बांबे बाजार चैंबर ऑफ कामर्स में आयोजित शोषित मुक्ति वाहिनी के कार्यक्रम में कही।
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उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार को विशेष संसद सत्र बुलाना चाहिए। इसमें केवल किसानों की बात हो। केंद्र में सरकार किसी की भी रही हो, लेकिन किसानों की आत्महत्याएं बंद नहीं हुई। किसानों को राहत देने के लिए सरकार को देश के लघु सीमांत किसानों का कर्ज माफ करना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश में किसानों के आंदोलन में कांग्रेस के कुछ नेताओं पर लग रहे आरोपों पर कहा कि हिंसा नहीं होनी चाहिए। सत्याग्रह और धरना प्रदर्शन करना हमारा संवैधानिक अधिकार है। जनता दल यू किसानों के आंदोलन में हिस्सा लेती रही है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य सही नहीं मिल रहा है। एमएसपी तय करने का तरीका गलत है। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में डा. स्वामी नाथन की अनुशंसाएं लागू करने की बात कही थी, लेकिन सरकार बनने के बाद भाजपा वादे भूल गई। उप्र में कानून व्यवस्था बेहद खराब है। प्रदेश के गरीब, दबे कुचलों का उत्पीड़न हो रहा है। कोई सुनवाई नहीं है। पूरी तरह से गुंडाराज कायम है। उन्होंने कहा कि जनता दल यू किसानों की पार्टी है। जिसके निर्माता चौ. चरण सिंह रहे हैं। हम गांधी को अपना आदर्श मानते हैं। 

प्रदेश के बंटवारे से मिलेगा पश्चिम की जनता को अधिकार 
मेरठ। उत्तर प्रदेश विभाजन एवं पुनर्गठन के मुद्दे पर शोषित मुक्ति वाहिनी की ओर से बांबे बाजार स्थित चैंबर ऑफ कामर्स में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें निर्णय लिया गया कि सात जुलाई को कमिश्नरी पार्क पर पांच हजार लोग अवकाश पर बैठकर प्रदेश विभाजन के लिए संकल्प पत्र भरेंगे। मुख्य अतिथि राज्यसभा सदस्य केसी त्यागी ने कहा कि राज्य पुनर्गठन आज राजनीति प्रश्न नहीं बल्कि जनमानस की समस्त समस्याओं का निराकरण का रास्ता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों से गन्ना भुगतान का झूठा दावा कर रही है। शोषित मुक्ति वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश नवल ने कहा कि उप्र चार भागों में विभाजित होना चाहिए। प्रदेश अधिक बड़ा होने के कारण कानून व्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी, लक्ष्य विहीन शिक्षा, किसान मजदूरों की समस्याओं का समुचित समाधान कोई भी सरकार नहीं कर पाई है। पूर्व सिंचाई मंत्री डॉ. मेराजुद्दीन ने कहा कि प्रदेश विभाजन के मुद्दे पर जितने भी आंदोलन हुए। उसमें दलित अल्पसंख्यकों की भूमिका न के बराबर रही है। संचालन गुरमीत साहनी ने किया। डॉ. ज्ञानेंद्र शर्मा, चौ. यशपाल सिंह, नीरजा तोमर, सीमांत दयाराम, धनवीर कश्यप, चरनजीत सिंह बिरदी, रविपाल सिरोही, सलीम सिद्दीकी, केके छाबड़ा आदि मौजूद रहे।
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