उस्ताद हशमत अली खां की स्मृति में शहर में अगस्त में विशाल संगीत समारोह का आयोजन होगा। इसमें अजराड़ा घराने के मशहूर तबला वादक उस्ताद हशमत अली खां को मेरठ सुरों से श्रद्धांजलि देगा। यह आयोजन हशमत अली खां के बेटे मशहूर सरोद वादक उस्ताद दानिश हसन खां और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त तबला वादक उस्ताद अकरम खां, मेरठ निवासी अनूप सिंघल अगस्त में करेंगे। यह जानकारी शनिवार को प्रेमपुरी रेलवे रोड में संगीत प्रेमी अनूप सिंघल के आवास पर बातचीत में दानिश हसन खां और अकरम खां ने दी।
उस्ताद अकरम खां ने बताया कि तबला एकेडमी ऑफ अजराड़ा घराना के तत्वावधान में स्मृति संध्या का आयोजन होगा। हमारे परिवार और अजराड़ा घराने का गहरा ताल्लुक क्रांतिधरा मेरठ से है, इसलिए यह आयोजन मेरठ में हो रहा है। सुर, संगीत, वादन के साथ हशमत अली खां को श्रद्धांजलि देंगे। आयोजन में मशहूर संतूर वादक भजन सोपोरी लाइव कंसर्ट करेंगे। उस्ताद अकरम खां, उस्ताद दानिश हसन खां, उनके बेटे रोमान खां, जरगाम खां व उनके शागिर्द तबले, सरोद की प्रस्तुति देंगे।
खैरनगर चूने वाली गली हैं उस्ताद हशमत अली खां की
अजराड़ा घराने के तबला दिग्गज उस्ताद हशमत अली खां का परिवार खैरनगर चूने वाली गली में रहता था। आज भी परिवार के कुछ सदस्य यहां मकान की देखरेख करते हैं। उनके तीनों बेटे अब बाहर ही रहते हैं।
भजन सोपोरी और हशमत अली खां में थी दोस्ती
भजन सोपोरी और हशमत अली खां साहब में बेहद गहरी दोस्ती थी। कश्मीर में दोनों दोस्तों ने लंबा वक्त रेडियो की नौकरी में साथ बिताया। दोनों संगीत के महारथी हैं, कई मंच भी साझा किए हैं। इसलिए भजन सोपोरी को विशेष तौर पर बुलाया जा रहा है।
महान कलाकारों के साथ मंच साझा कर चुके हैं दोनों भाई
उस्ताद अकरम खां और दानिश हसन खां पिता की तरह वादन की दुनिया की मशहूर हस्ती हैं। दोनों भाई कई बड़े कलाकारों के साथ मंच साझा कर चुके हैं। पंडित रविशंकर, उस्ताद बिलावल खां, गिरिजा देवी, पंडित बिरजू महाराज, भजन सोपोरी, डागर बंधु, शाहिद परवेज, शुजात, गौरव मजूमदार कुछ प्रमुख नाम हैं।
तैयारी के कायदे विकसित करने वाला घराना
अजराड़ा घराने की विशेषता है कि यहां तैयारी के कायदों को विकसित किया गया। बोलों को किनार पर बजाया। घिणांक, घिनक इसी घराने से उपजे बोल हैं। तिरकिट को मंजिल में बजाने व त्रिते के बोल को कायदे में बजाने का चलन अजराड़ा घराने ने शुरू किया। बोलों के द्रुत गति में बजाने का विस्तार, कायदों में बदलाव किया। दो की बजाय प्रथम तीन अंगुलियों से तबला बजाना भी इसी घराने की देन है।