फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घाटे का सौदा साबित हो रहीं शराब की दुकानें

विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। कोरोना काल में आबकारी विभाग की दुकानें घाटे का सौदा साबित हो रही हैं। जिन दुकानों के लिए जोर-आजमाइश हुआ करती थी, आज कोई खरीदार नहीं है। कई चरण की प्रक्रिया के बाद भी करीब 90 दुकानें शेष हैं। उनके लिए खरीदार ढूंढने में अफसरों के पसीने छूट रहे हैं।
विज्ञापन

आबकारी विभाग ने वर्ष 2020-21 के लिए फरवरी में लाइसेंस रिन्यूअल की प्रक्रिया शुरू की। नई आबकारी नीति के तहत प्रक्रिया संपन्न कराई परंतु काफी दुकानें रिन्यू ही नहीं हो सकीं। इसी बीच लॉकडाउन शुरू हो गया। काफी दिन बाद ढील मिली तो आबकारी विभाग सक्रिय हो गया। उसने नए लाइसेंस के लिए आवेदन मांगे परंतु खास फायदा नहीं हुआ और तकरीबन 99 दुकानें शेष रह गईं। योजना के प्रति रुझान नहीं मिलने पर विभाग ने दुकानों को दो हिस्से में बांटने का निर्णय किया। आशंका थी कि लाइसेंस फीस अधिक होने पर आर्थिक संकट से जूझ रहे आवेदक आगे नहीं आ रहे हैं। दुकानों को दो हिस्सों में बांटने के बाद उनकी संख्या 198 हो गई। इस प्रक्रिया के बाद भी तकरीबन 119 दुकानें शेष रह गईं। आखिरी प्रक्रिया में 98 दुकानें शेष हैं, जिन्हें खरीदार नहीं मिल रहे हैं। दरअसल, गत वर्ष भी कुछ ऐसा ही संकट सामने आया था। विभाग ने दुकानों को दो भागों में न बांटकर पहले लाइसेंस फीस में 20 फीसदी की छूट दी। काफी दुकानें इस प्रक्रिया में बिक गईं। इसके बाद शेष दुकानों के लिए 40 फीसदी छूट का एलान कर दिया और चंद दिनों में सभी दुकानें बिक गईं।
वर्जन
आबकारी नीति के तहत प्रक्रिया संपन्न कराई जा रही है। वर्तमान हालात से अफसरों को अवगत करा दिया है। उनके निर्देश अनुसार ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।-आलोक कुमार, जिला आबकारी अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें