मेरठ। कैंट बोर्ड अधिकारियों की लापरवाही के कारण रविवार को आबूलेन मार्केट में अंधेरा पसर गया। कैंट बोर्ड द्वारा चार साल से भुगतान नहीं करने पर ठेकेदार ने यहां लगाई गई सोलर लाइटें उतार लीं। इसे लेकर व्यापारियों में आक्रोश है। कैंट में ऐसा पहली बार हुआ है जब भुगतान न होने पर लाइटें हटाई गई हैं।
शीलकुंज निवासी कैप्टन तनुज कुमार ने सीईओ को पत्र लिखकर कहा था कि उनकी फर्म ने अक्टूबर 2015 में बेगमपुल से दास मोटर्स तक आबूलेन पर 4 लाख 69 हजार रुपये की लागत से 11 सोलर लाइटें और फाउंटेन लगवाए थे। आरोप था कि उनको इसका भुगतान नहीं किया गया, जबकि कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने तो ऐसा कोई काम होने से ही मना कर दिया था। तनुज ने आरटीआई में जानकारी मांगी तो कैंट बोर्ड को सही जानकारी देनी पड़ी। तनुज कुमार ने पत्र में कहा था कि यदि मेरा भुगतान नहीं किया जाता है तो कैंट बोर्ड उनकी 11 लाइटें, फाउंटेन और अन्य सामान को सौंपने का कष्ट करें। चेतावनी देने के बाद रविवार सुबह ठेेकेदार ने सोलर लाइटें, फाउंटेन उतार लिया। वहीं बाकी बचे हुए सामान को सोमवार को उतारने के लिए कहा। इस पूरे प्रकरण के बाद कैंट बोर्ड के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। आबूलेन के व्यापारियों का कहना है कि इस संबंध में कैंट बोर्ड के अधिकारियों से फोन पर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इस मामले में पूर्व बोर्ड उपाध्यक्ष बीना वाधवा का कहना है कि वे अफसरों से बात करेंगी। अंधेरा होने से वहां पर आने वाले लोगों के साथ व्यापारियों को भी परेशानी होगी। आबूलेन व्यापार संघ के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह का कहना है कि यह बेहद दुखद है।
आखिर कहां जा रहा था विज्ञापन का पैसा
आबूलेन पर बेगमपुल से लेकर दास मोटर्स तक ठेकेदार ने जो 11 सोलर लाइटें लगाई हुई थी उन के पोल पर कैंट बोर्ड विज्ञापन लगा रहा था। व्यापारियों के मुताबिक उससे हर महीने 80 हजार रुपये की आमदनी भी हो रही थी। आखिर वह पैसा कहां जा रहा था। इस सवाल का जवाब कैंट बोर्ड के किसी अफसर के पास नहीं है।