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करोड़पति बंदी की फरारी में मेरठ में मुकदमा

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मेरठ। 263 करोड़ की टैक्स चोरी में आरोपी मनोज अरोड़ा के पुलिस कस्टडी से फरार होने के मामले में मेरठ में मुकदमा दर्ज कराया गया है। जबकि आरोपी दिल्ली में एम्स के बाहर से फरार हुआ था। एसआई ज्ञान प्रकाश ने बंदी मनोज अरोड़ा, पुलिस लाइन के हेड कांस्टेबल ज्वाला सिंह, कांस्टेबल अरुण कुमार और संदीप कुमार के खिलाफ केस दर्ज कराया है। तीनों पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं। उनकी बर्खास्तगी की रिपोर्ट भी पुलिस अधिकारियों द्वारा भेजी जा चुकी है।
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मनोज अरोड़ा को 10 अगस्त को मेरठ जेल से एम्स हॉस्पिटल दिल्ली ले जाया गया था। लेकिन वह तीनों पुलिसकर्मियों को झांसा देकर इनोवा गाड़ी से फरार हो गया था। अगले दिन पुलिस ने इनोवा को सिरसा से बरामद किया था। हालांकि बुधवार को मनोज दिल्ली में पकड़ा गया। मेरठ पुलिस ने शुक्रवार को उसे फिर जेल भेज दिया। मनोज अरोड़ा ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह दिल्ली से इसलिए भागा था ताकि दिल्ली में ही पुलिस मुकदमा दर्ज कराए। बाद में उसे तिहाड़ जेल भेजा जाए। बंदी का कहना है कि वह दिल्ली की जेल में ही रहना चाहता है। लेकिन मेरठ पुलिस ने सिविल लाइन थाने में ही केस दर्ज किया।
सिपाही से लेकर जेल कर्मचारी व डाक्टर भी घेरे में
सीओ सिविल लाइन हरिमोहन सिंह पूरे प्रकरण में जांच कर रहे हैं। बंदी के बयान से पुलिस अफसर हैरान हैं। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, मनोज अरोड़ा ने बताया कि उसका एक माह में तीन लाख रुपये खर्च होता था। उसे पेशी या अस्पताल लाने वाले हर सिपाही पर एक बार में दस हजार रुपये खर्च किए जाते थे। इलाज के लिए दिल्ली भेजने वाले डॉक्टर को आठ हजार रुपये प्रति सप्ताह, कचहरी स्थित हवालात के हेड पुलिसकर्मी को दस हजार रुपये दिए जाते थे। पुलिस लाइन से लाने-ले जाने वाले सिपाहियों को 10-10 हजार रुपये दिए जाते थे। मामले में पेशी पर साथ जाने वाले पुलिसकर्मी, जेल के कर्मचारी व डॉक्टर भी जांच के घेरे में हैं।
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