चंद्रशेखर के बाहर जाने के दौरान विकास और उसका साथी सचिन चंद्रशेखर के घर पहुंचे। तीनों ने मिलकर पहले रिया और फिर पूनम की चाकू से गोदकर हत्या कर दी। करीब 10 मिनट बाद चंद्रशेखर लौटे तो उसको भी तीनों ने चाकू से मार डाला। तिहरे हत्याकांड की सूचना पर तत्कालीन आईजी जोन सुजीत पांडेय, डीआईजी लक्ष्मी सिंह और एसएसपी जे. रविंदर गौड़ फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे थे। हालात देखते हुए शास्त्रीनगर में सेना लगानी पड़ी थी।
इस मामले में जिला जज रजत सिंह जैन की अदालत में सुनवाई चल रही थी। सरकारी अधिवक्ता सर्वेश शर्मा और पदम सिंह ने बताया कि चंद्रशेखर के भांजे मनीष ने मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना में पता चला कि विकास उर्फ विक्की की रिया से दोस्ती थी। बाद में विकास को पता चला कि रिया गलत काम करती है।
विकास ने उदयवीर को चंद्रशेखर के घर पर भेजा। तीनों की हत्या के बाद चंद्रशेखर के घर से एलसीडी और रिया की स्कूटी आरोपी ले गए थे। 24 जून 2016 को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने खुलासा किया था। मामले में सरकारी वकील पदम सिंह ने 13 गवाह अदालत में प्रस्तुत किए। उनकी गवाही और पत्रावली पर उपस्थित साक्ष्य के आधार पर सजा सुनाई गई।
खौफनाक वारदात कभी नहीं भूलेगा शास्त्रीनगर
खून से लथपथ युवती की लाश बेड पर नग्न अवस्था में थी। दंपती की लाश फर्श पर पड़ी थी। इस खौफनाक मंजर को शास्त्रीनगर के लोग कभी भी नहीं भूल सकते। तिहरे हत्याकांड की सूचना पर शहर के व्यापारी, भाजपा नेता मौके पर पहुंचे। लोगों का आक्रोश फूटा। इससे पहले मामला तूल पकड़ता तत्कालीन आईजी सुजीत पांडेय और डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने खुलासा कर दिया कि गलत काम के चलते तीनों की हत्या हुई है।
तीन दिन पुलिस की दस टीमों ने घेराबंदी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। वारदात के बाद तीनों आरोपी हरिद्वार चले गए थे। वहां घेराबंदी हुई तो हिमाचल भागने की फिराक में थे। तत्कालीन एसओजी प्रभारी संजीव यादव और उनकी टीम ने आरोपियों को दबोचा था।