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Meerut News: बुजुर्ग की हत्या के दोषी को आजीवन कारावास

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तीन वर्ष पुराने मामले में न्यायालय ने 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। सरधना के मोहल्ला गढ़ी खटीकान में करीब तीन वर्ष पूर्व बुजुर्ग वीर सिंह (72) की पीटकर हत्या करने के दोषी विनोद को को एडीजे-9 ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
मोहल्ला गढ़ी खटीकान निवासी श्यामलाल ने थाने में 17 अक्तूबर 2022 को दर्ज कराई थी। जिसमें बताया था कि उनके पिता वीर सिंह पड़ोसी नैनू के घर के बाहर बैठे थे। तभी मोहल्ले का ही विनोद शराब के नशे में वहां पहुंचा और उत्पात मचाने लगा। वीर सिंह ने विरोध किया तो विनोद ने डंडे से पीटकर वीर सिंह को अधमरा कर दिया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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शोर सुनकर आए मोहल्ले के लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया था। पुलिस ने इस मामले में विवेचना के बाद चार नवंबर 2022 को कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। इस मामले में सुनवाई के बाद गवाहों और साक्ष्य के आधार पर कोर्ट ने विनोद को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

दहेज हत्या में पति को 10 साल, सास-ससुर को एक-एक वर्ष का कारावास
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। खरदौनी गांव में हुई महिला की दहेज हत्या के केस में मंगलवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट-18 ने पति शहजाद को 10 वर्ष सश्रम कारावास, ससुर हनीफ और सास आमना को एक-एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। तीनों को पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया।
नगलामल गांव निवासी मोहम्मद शराफत ने 23 जनवरी 2018 को मुंडाली थाने में अपनी बहन तब्बसुम की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 14 अप्रैल 2013 को उनकी बहन की शादी इंचौली क्षेत्र के खरदौनी निवासी शहजाद से हुई थी। ससुराल वाले दहेज के लिए तब्बसुम का उत्पीड़न करने लगे। 18 अक्तूबर 2017 को बहन को नगलामल ले आया था। 21 जनवरी 2018 को पति शहजाद उसे अपने साथ ले गया। इसके बाद उसकी बहन लापता हो गई थी।
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25 जनवरी 2018 को तब्बसुम का शव नगलामल मिल मार्ग स्थित ईख के खेत में पड़ा मिला था। मोहम्मद शराफत ने बहन के पति शहजाद, ससुर हनीफ, सास आमना, शहजाद के चाचा लियाकत, मामा रफीक, मौसा यामीन, मौसी नन्ही, हसीना के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस की विवेचना में पति और सास-ससुर के अलावा अन्य सभी आरोपियों की संलिप्तता न मिलने पर उनके नाम निकाल दिए गए। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के बाद गवाहों और साक्ष्य के आधार पर पति और सास-ससुर को दोषी माना।
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