बिजनौर। पिंजरों में फंसे गुलदार को जंगल में छोड़ने से पहले रेडियो कॉलर पहनाया जाएगा। वन विभाग ने शासन को पत्र लिखकर इसकी जरूरत बताई है। इससे गुलदार और मानव के बीच होने वाले संघर्ष को रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही गुलदारों के व्यवहार पर शोध भी हो सकेगा।
जिले में पिछले दो साल से गुलदार गन्ने के खेतों में घूम रहे हैं। इनकी संख्या के अनुमान की बात करें तो 500 से ज्यादा है। वहीं लगातार वन विभाग पिंजरे लगाकर गुलदार को पकड़ भी रहा है। पिछले दो साल में गुलदार 27 लोगों की जान ले चुके हैं और 100 से ज्यादा लोग हमले में घायल हो चुके हैं। आबादी क्षेत्रों में जिन गुलदारों को पकड़ा, शुरुआत में उन्हें चिड़ियाघर भिजवाया। अब वहां भी इनकी संख्या बढ़ने से जंगल में छोड़ना पड़ रहा है।
ऐसे में गुलदार आबादी में वापिस न आ जाए, इसके लिए वन विभाग ने गुलदारों को रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। शासन को पत्र लिखकर इसकी अनुमति मांगी है।
nडब्ल्यूडब्ल्यूएफ की एक यूनिट खोलने की तैयारी : डीएफओ ज्ञान सिंह ने बताया कि जिस तरह बिजनौर में गुलदार की समस्या बढ़ी है, उस पर नियंत्रण की आवश्यकता भी बढ़ गई है। उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ को पत्र लिखा है। जिसमें उनसे जिले में एक यूनिट खोलने की जरूरत के बारे में बताया है। यदि ऐसा होता है कि विशेषज्ञ भी इस समस्या से निपटने पर लगाकर शोध कार्य कर सकेंगे।
शिवालिक के जंगल में गुलदार छोड़ने की योजना : नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच पड़ने वाला जंगल शिवालिक कहलाता है। यहां पहले गुलदार छोड़े जा चुके हैं। अभी तक वन विभाग उनके कार्बेट पार्क में जाने का दावा करता आया है, वहीं जिले के लोग उनके लौटने की बात करते रहे हैं। वन विभाग आने वाले समय में इस जंगल को गुलदार रिजर्व फॉरेस्ट बनाने की योजना पर भी काम रहा है। ऐसे में इसी क्षेत्र में पकड़े जाने वाले गुलदार छोड़े जाएंगे।