भराला गांव और आसपास तेंदुए की दहशत कम नहीं हो रही है। बढ़ती दहशत चलते बच्चों ने स्कूल तो किसान व मजदूरों ने खेतों पर जाना बंद कर दिया है। दहशत के चलते ग्रामीण घरों में कैद होने पर मजबूर हो गए है। वहीं, वन विभाग की टीम बृहस्पतिवार को जंगल में पहुंची और तेंदुए का शिकार बने पाड़ा के अवशेष कब्र से निकाले। टीम के अनुसार पोस्टमार्टम के बाद साफ होगा कि पाड़ा का शिकार तेंदुए ने किया या अन्य किसी जंगली जानवर ने।
तीन दिन भराला-इकलौता मार्ग पर जंगल में एक पाड़ा को जंगली जानवर ने अपना निशाना बना लिया था। ‘अमर उजाला’ ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। तेंदुए की आहट से गांव में दहशत का माहौल पैदा हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ कब आ जाए, कुछ पता नहीं चल सकता है। दो साल पहले भी क्षेत्र में तेंदुआ आया था। उस समय के अलावा अब भी वन विभाग के अधिकारी तेंदुए की आमद को मानने को तैयार नहीं है।
शिकायत पर कब्र खोदी
ग्रामीणों की सूचना पर बुधवार को सरधना से रेंजर राजीव वर्मा, दरोगा अनिल व मनोज शर्मा ने मौके पर जांच की थी तो तेंदुए के आने की बात को नकार दिया था। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की तो बृहस्पतिवार को फिर टीम गांव में पहुंची और पाड़ा के शव को कब्र से निकलवाया।
टीम में मौजूद अफसरों ने ग्राम प्रधान उपेंद्र चौधरी से कहां कि तेंदुए की पुष्टि के लिए हम पाड़ा के शव का पोस्टमार्टम कराएंगे। इसके बाद ही सही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। टीम के सदस्यों ने इस मामले को गोपनीय रखना चाहा और यहां तक कह दिया कि मीडिया को इसकी सूचना न दी जाए।
पंजों की फिर की जांच
वन विभाग की टीम ने ग्राम प्रधान के अलावा ग्रामीण महक सिंह, राजेंद्र, कालूराम, विरेंद्र आदि लोगों को लेकर घटना स्थल पर मिले पंजों के निशानों को दोबारा देखा। पता लगाने की कोशिश की कि यह निशान तेंदुए के पंजों के हैं या किसी दूसरे जानवर के।