हादसे के बाद विलाप करते परिजन।
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हापुड़-किठौर मार्ग स्थित ग्राम अतराड़ा के निकट बृहस्पतिवार को स्कार्पियो ने किठौर की ओर से आ रही बाइक को टक्कर मार दी। इसमें बाइक सवार दंपति और दो बच्चे घायल हो गए। लोग घायलों को हापुड़ के अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में पिता-पुत्री ने दम तोड़ दिया। वहीं, मां-बेटे की हालत गंभीर है। अस्पताल पहुंची हापुड़ पुलिस ने मृतकों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
हापुड़ के थाना बाबूगढ़ क्षेत्र के गांव आरिफपुर सरावनी निवासी रहीस (45) पुत्र मुस्तकीम की हापुड़ में सिकंदर गेट मोती कॉलोनी निवासी बहनोई आस मोहम्मद की मौत हो गई थी। रहीस अपनी पत्नी नसीम (42), बेटा मुसीर (11) और बेटी इसरा (8) के साथ बाइक पर सवार होकर बहन को दुपट्टा ओढ़ाने की रस्म निभाने जा रहा था। हापुड़-किठौर रोड पर गांव अतराड़ा स्थित रंजीत देवता के निकट सामने से तेज गति से आ रही स्कार्पियो ने टक्कर उन्हें टक्कर मार दी। राहगीरों ने हादसे की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम को दी। इसके बावजूद पुलिस काफी देर तक नहीं पहुंची तो राहगीर घायलों को निजी वाहन से हापुड़ ले जाने लगे। रास्ते में रहीस और बेटी इसरा की मौत हो गई। वहीं, नसीम और पुत्र मुसीर को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं, कार्यवाहक थानाध्यक्ष शिवदत्त सिंह का कहना है कि पुलिस जानकारी मिलते ही घटनास्थल पर पहुंची परंतु राहगीर घायलों को अस्पताल ले जा चुके थे। उन्होंने बताया कि तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
छोटे भाई की भी सड़क हादसे में हुई थी मौत
मुस्तकीम के दो बेटे और छह बेटियां थीं। रहीस से छोटे भाई की करीब दस वर्ष पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वहीं रहीस राज मिस्त्री का काम करके परिवार का पालन पोषण करता था। हापुड़ निवासी बहनोई की 40 दिन पहले मौत हो जाने से उसकी बहन सीदन इद्दत में बैठी थी। रहीस बृहस्पतिवार को इद्दत से उठने पर बहन को दुपट्टा ओढ़ाने की रस्म अदायगी के लिए परिवार के साथ हापुड़ जा रहा था।
हेलमेट होता तो शायद बच जाती जान
बाइक सवार रहीस ने हेलमेट भी नहीं लगाया था। अगर हेलमेट पहना होना तो शायद उसकी जान बच जाती। वहीं रहीस और उसकी बेटी इसरा की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनका रो-रोकर बुरा हाल था।
पुलिस नहीं पहुंची
घटनास्थल से अतराड़ा पुलिस चौकी करीब 500 मीटर दूर है। यहां केवल एक सिपाही तैनात था। राहगीरों ने हादसे की जानकारी तुरंत पुलिस को दी परंतु वह एक घंटे तक नहीं पहुंची।