शहर में एलईडी लगीं नहीं और स्ट्रीट लाइटें धोखा देने लगी हैं। 20 से 25 प्रतिशत स्ट्रीट लाइटें खराब हो गई हैं, जिसके कारण कई मोहल्लों में अंधेरा छा गया है। अधिकारी निगम के स्टोर में सामान न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। वहीं अंधेरे के कारण लोगों में गुस्सा है। मंगलवार को सूरजकुंड क्षेत्र के लोग भाजपा पार्षदों के नेतृत्व में नगरायुक्त से मिले। उन्होंने खराब लाइटों को ठीक कराने की मांग की।
नगर निगम प्रशासन एक साल में शहर में एलईडी लगवाने का आश्वासन दे रहा है। लेकिन अभी तक कंपनी से पूरी तरह करार भी नहीं हुआ है। शहर में लगी सोडियम और ट्यूब लाइटों की रिपेयर का सामान भी खत्म होने लगा है। जिस कारण खराब लाइटें ठीक नहीं हो पा रही हैं। स्ट्रीट लाइटों को लेकर ईद से पहले बोर्ड बैठक में भी मामला उठा था। उसके बाद नगर निगम प्रशासन ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में तो स्ट्रीट लाइटें दुरुस्त करा दीं, लेकिन हिंदू इलाकों की अब तक खबर नहीं ली।
पार्षद दिनेश चौधरी, पंकज कतीरा, संजीव पुंडीर, राजू वर्मा, हरिकिशन गुप्ता, मनोज वर्मा ने नगरायुक्त से कहा कि लाइटें खराब होने के कारण अंधेरा पसरा है। कर्मचारियों से शिकायत करते हैं तो कोई सुनने को तैयार नहीं है। कर्मचारी अभद्र व्यवहार करते हैं। पार्षदों की शिकायत पर नगरायुक्त ने पथ प्रकाश प्रभारी राजेश चौहान को बुलाकर वार्ता की। साथ ही निर्देश दिए कि शीघ्र शहर की खराब लाइटों को ठीक किया जाए। अगर सामान की कमी है तो मंगवाया जाए।
ये है खराब लाइटों की स्थिति
शहर में कुल स्ट्रीट लाइटें - 41 हजार
शास्त्रीनगर जोन में लाइटें लगभग 10 हजार, खराब दो हजार
कंकरखेड़ा जोन में लाइटें लगभग 12 हजार, खराब चार हजार
मुख्यालय जोन में लाइटें लगभग 12 हजार, खराब दो हजार
दिल्ली रोड से जुडे़ इलाकों में लाइटें लगभग सात हजार, खराब एक हजार