जनता की समस्याओं को लेकर जिले के आला अधिकारी गंभीर नहीं हैं। सीएम की प्राथमिकता में शामिल ऑनलाइन शिकायत निस्तारण योजना के तहत शुरू किए गए जन सुनवाई पोर्टल पर 50 से अधिक अधिकारियों ने एक माह से लॉग इन ही नहीं किया है। इनमें माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त शिक्षा निदेशक भी शामिल हैं। इस पर शासन ने सख्त रुख अपनाया है। प्रमुख सचिव ने ऐसे सभी अधिकारियों की सूची डीएम को भेजकर अंतिम चेतावनी जारी की है।
मुख्यमंत्री की पहल पर शासन ने ऑनलाइन शिकायत के लिए पोर्टल तैयार किया है। आईजीआरएल पोर्टल के नाम से संचालित इस पोर्टल पर मंडल, जिला, तहसील और ब्लॉक के साथ ही थाना और पुलिस चौकी तक को शामिल किया गया है। प्रदेश शासन के तहत आने वाले तमाम विभाग इसमें शामिल हैं।
शासन ने एक माह में जन सुनवाई पोर्टल की प्रगति खंगाली तो चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई। इसमें मेरठ के पचास अधिकारी ऐसे मिले, जिन्होंने पोर्टल पर लॉग इन ही नहीं किया। प्रमुख सचिव अमित कुमार ने ऐसे अधिकारियों की सूची जिलाधिकारी मेरठ को भेजी है। जिसमें इन अधिकारियों के नाम, पद और विभाग का पूरा ब्योरा दिया गया है। सभी अधिकारियों को इस मामले में अंतिम चेतावनी जारी की गई है। इस सूची में बेसिक शिक्षा, पुलिस, माध्यमिक शिक्षा, चिकित्सा, विद्युत, कृषि आदि तमाम विभागों के अधिकारी शामिल हैं।
ये है जनसुनवाई पोर्टल
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जन शिकायतों को एक ही जगह केंद्रित कर उसकी मॉनिटरिंग के लिए छह माह पूर्व जन सुनवाई पोर्टल लांच किया था। इस पोर्टल पर तहसील दिवस, थाना दिवस, जिलाधिकारी कार्यालय, जन सुविधा केंद्रों आदि के माध्यमों सहित मुख्यमंत्री कार्यालय में आने वाली शिकायतों को डाला जाता था। जहां से विभागवार इन शिकायतों को भेजकर तय समय सीमा के भीतर उनके निस्तारण का आदेश भी जारी होता है। शासन स्तर पर नियुक्त तकनीकी अधिकारी प्रत्येक अधिकारी की इस पोर्टल पर सक्रियता की जांच करता है और रिपोर्ट शासन के प्रमुख सचिव को देता है। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय जाती है।
21 जून से नहीं खोला पोर्टल
अधिकांश अधिकारी इस पोर्टल पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण तो दूर इसे खोलकर देख भी नहीं रहे हैं। जब तकनीकी अधिकारी ने लखनऊ में वेब पोर्टल देखा तो पाया कि अकेले मेरठ जनपद के ही पचास अधिकारी ऐसे हैं, जिन्होंने 21 जून से अब तक इस पोर्टल को खोलकर ही नहीं देखा है।
सीधे सुनवाई की तो सोचिए भी मत
जन सुनवाई पोर्टल की समीक्षा सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से हो रही है, जब उसका ये हाल है तो सीधे अफसरों के यहां होने वाली शिकायतों का क्या होगा। इसकी सहज कल्पना की जा सकती है। तमाम दफ्तर ऐसे हैं जहां पर पीड़ित चक्कर लगाकर हार जाते हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं होती है। ऐसे विभागों में आपूर्ति, नगर निगम, पुलिस और विद्युत विभाग मुख्य रूप से शामिल हैं।
ये है प्रमुख लापरवाह अधिकारी
संजय यादव सचिव क्षेत्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद, तंत्रपाल सिंह जिला युवा कल्याण अधिकारी, कृष्ण कुमार डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटीज, उमा शंकर वर्मा अधीक्षण अभियंता लोनिवि, राधेश्याम यादव मुख्य अभियंता पश्चिमी विद्युत वितरण निगम, स्टांप एवं रजिस्ट्री विभाग के सभी डिप्टी रजिस्ट्रार, सचिव मंडी परिषद, जिला कृषि रक्षा अधिकारी, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी, क्षेत्रीय अधिकारी खेल कूद, परियोजना प्रबंधक जल निगम, उप निदेशक पंचायत, पशु चिकित्साधिकारी, सीओ विनीत भटनागर और कई पुलिस चौकी के प्रभारी सहित कई ब्लॉक स्तरीय अधिकारी शामिल हैं।