संयुक्त सचिव संजय उपाध्याय मेडिकल चिकित्सा ने शुक्रवार को लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कालेज का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने कालेज प्रशासन को 100 में से 70 नंबर दिए। आईएसयू में एक मरीज के बेड पर प्लेन पेपर पर ट्रीटमेंट से जुड़ी दवाएं लिखी मिलीं। इस पर संयुक्त सचिव ने उसकी फोटो कॉपी करा ली।
करीब 11 बजे संयुक्त सचिव अचानक मेडिकल कालेज पहुंचे, तो चिकित्सकों में हड़कंप मच गया। उन्होंने इमरजेंसी में मरीजों को दिए जा रहे ट्रीटमेंट, डायलिसिस, ब्लड बैंक में खून की उपलब्धता व उसके रखरखाव, एक्सरे कक्ष आदि का निरीक्षण किया। डिजिटल एक्स-रे मशीन न होने पर प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता को निर्देश दिया कि प्रस्ताव बनाकर भेजें, शासन के माध्यम से मशीन उपलब्ध कराई जाएगी।
नेत्र रोग विभाग में उन्हें सुविधाएं सबसे अच्छी मिली, इसके लिए उन्होंने डा. संदीप मित्थल के प्रयासों की सराहना की। डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता ने बताया कि कालेज परिसर में पांच लिफ्ट हैं, लेकिन संचालित सिर्फ एक ही है। बाकी खराब हैं, जिन्हें रिपेयर कराने के लिए बजट चाहिए। संयुक्त सचिव ने आईएसयू वार्ड में मरीजों का हालचाल लिया। यहां प्लेन पेपर पर दवाएं लिखी मिलीं, तो कालेज प्रशासन से उसकी फोटोकॉपी मांग ली। जिसे उन्होंने अपनी फाइल में अटैच कर लिया।
संयुक्त सचिव ने कहा कि मेडिकल कालेजों में लैब बनाई जाएगी। लैब में टेस्टिंग के बाद अच्छी दवाओं को खरीदने का आर्डर दिया जा सकेगा। स्थायी तौर पर सेवारत डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते मिले, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एमआरआई की सुविधा दो अक्टूबर तक
प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता ने कहा कि अगले महीने से पीपीपी मॉडल पर लैब शुरू हो जाएगी। अगर कोई बाहर से लैब में जांच कराने का दबाव डालता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी बीच सीटी स्कैन और एमआरआई मशीन मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी चालू न हो पाने का मुद्दा भी उठा।
पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता ने कहा कि एमआरआई दो अक्टूबर तक चालू हो जाएगी, जबकि सिटी स्कैन का मुद्दा पाइपलाइन में है। मेडिकल कालेज को डीजल के लिए अलग से बजट ने दिए जाने की बात भी उठी। प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता ने संयुक्त सचिव संजय उपाध्याय को अवगत कराया कि करीब चार घंटे तक पावर कट होता है, जिस कारण आईसीयू तक में एसी की सुविधा नहीं दे पाते हैं। इस पर संयुक्त सचिव ने कहा कि डीजल के वार्षिक खर्च के हिसाब से प्रस्ताव बनाकर भेजें, उसे शासन से स्वीकृत करा दिया जाएगा।
मेडिकल कालेज में ट्रॉमा सेंटर शुरू न हो पाने को लेकर प्राचार्य ने संयुक्त सचिव को बताया कि नौ करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है, जिसमें से 90 लाख रुपये भवन निर्माण के लिया आया था। अब बिल्डिंग तैयार है, लेकिन बाकी करीब आठ करोड़ रुपया नहीं मिला है। उधर, राज्य सरकार लेवल टू के ट्रॉमा सेंटर को लेवल वन में परिवर्तित किए जाने पर काम कर रही है।
प्राचार्य से जब पूछा गया कि जनप्रतिनिधि चिकित्सा सुविधा बढ़ाने के लिए किस तरह से सहयोग कर रहे हैं। तो प्राचार्य का कहना था कि जनप्रतिनिधियों की तरफ से कभी मेडिकल कालेज के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।