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स्पोर्ट्स फैक्टरी में आग से लाखों का नुकसान

Tue, 11 Jun 2019 04:12 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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स्पोर्ट्स फैक्टरी में लगी आग - फोटो : स्पोर्ट्स फैक्टरी में लगी आग
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मेरठ की फूलबाग कॉलोनी स्थित एनके स्पोर्ट्स फैक्टरी में सोमवार सुबह भीषण आग लगी। आग की लपटें उठते देखकर आसपास रहने वाले लोगों में अफरातफरी मच गई। कई लोग घर खाली कर सड़क पर आ गए। सूचना के करीब एक घंटे बाद पहुंची फायर ब्रिगेड टीम को आग पर काबू पाने में करीब पांच घंटे लगे। एक अनुमान के मुताबिक आग से करीब 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। फैक्टरी में लोअर और टीशर्ट बनते थे। फायर ब्रिगेड के देर से पहुंचने के कारण लोगों में आक्रोश दिखा।
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सूरजकुंड स्थित नगर निगम डिपो के सामने फूलबाग कॉलोनी निवासी एनके खंडूरी की एनके स्पोर्ट्स फैक्टरी है। यह फैक्टरी रिहायशी इलाके में है। सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे फैक्टरी से आग की लपटें उठती हुई दिखाई दीं। उस समय फैक्टरी के गेट पर ताला लगा था। कर्मचारियों के आने का समय हो रहा था। फैक्टरी के सामने रहने वाले विद्युत विभाग से रिटायर्ड जूनियर इंजीनियर सुरेंद्र अग्रवाल ने आग देखी तो शोर मचाना शुरू कर दिया। आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। सूचना के आधे घंटे बाद फैंटम आई और आग देखकर लौट गई।

जब तक फायरब्रिगेड की गाड़ी पहुंची, आग भयावह हो गई थी। आग बुझाने के लिए गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर से भी गाड़ियां बुलाई गईं। आग बुझाने के लिए फायरब्रिगेड को पानी तक कम पड़ गया। एसपी सिटी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह, एएसपी रामअर्ज समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने सूरजकुंड मार्ग पर रूट डायवर्जन कर वाहन रोकने शुरू कर दिए। डीएम अनिल ढींगरा और एसएसपी नितिन तिवारी भी मौके पर पहुंचे। रिहायशी इलाके में फैक्टरी चलने को लेकर पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने जानकारी ली।
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रिहायशी इलाके में अवैध रूप से चल रही थी फैक्टरी  
मेरठ।
स्पोर्ट्स फैक्ट्री रिहायशी इलाके में अवैध रूप से चल रही थी। आग लगने के बाद यह पोल खुली। तंग गली में बनी अवैध फैक्टरी में आग बुझाने में दमकल विभाग हांफ गया। करीब 11 घंटे तक फायरब्रिगेड आग बुझाने में लगी रही। वहीं फूलबाग कॉलोनी के लोग दिनभर दहशत में रहे। आग में कई धमाके भी हुए। इससे फैक्टरी व आसपास के तीन घरों में दरार तक आ गई। फैक्टरी रिहायशी इलाके में होने के चलते वहां भीड़ लगी रही। इससे फायर ब्रिगेड को काफी दिक्कत हुई। एसपी सिटी और एएसपी माइक लेकर लोगों ने अनुरोध करते रहे कि फैक्टरी से दूर रहे और फायरब्रिगेड को आग बुझाने दें।

फैक्टरी से सामान बाहर निकाला
आग
की सूचना पर सिविल डिफेंस की टीम भी मौके पर पहुंची। उन्होंने फैक्टरी के आसपास के इलाके के घर से लोगों को निकाला। उन्हें आग से दूर रहने की हिदायत दी। वहीं बगल वाली फैक्टरी से भी स्पोर्ट्स का सामान निकलवाया। इस दौरान वहां पर अफरातफरी का माहौल रहा।

किसने दी फैक्टरी की परमीशन
फैक्टरी में
आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं मिले। यह मानकों के विपरीत चल रही थी। वहीं रिहायशी इलाके में फैक्टरी चलने की परमीशन किसने दी। एमडीए से भी कोई परमीशन नहीं होना बताया गया। मौके पर पहुंचे डीएम और एसएसपी ने इस फैक्टरी से जुड़ी सारी जानकारी मांगी है।

बेचैन रहे लोग
फैक्टरी में
धमाके होने पर आसपास के घरों में रहने वाले लोग दहशत में रहे। जबकि फायरब्रिगेड और पुलिस प्रशासन आग बुझाने में जुटा था। लगातार पानी की बौछार की जा रही थी। लेकिन आग कम होने का नाम नहीं ले रही थी। फायरब्रिगेड ने कई बार बिल्डिंग में घुसकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद फायरब्रिगेड कर्मियों ने पड़ोसी कैलाश चंद और सुरेंद्र अग्रवाल की छत पर चढ़कर आग को कवर करने का प्रयास किया। आग बुझाने के लिए उनके समबर्सिबल पंप भी चलवाए। गली तंग होने के कारण दमकल वाहन मुश्किल से अंदर आ पा रहे थे।

बेहोश हो गए चार लोग
आग
की लपटों से चार लोग झुलस गए। पड़ोसी सुरेंद्र अग्रवाल का मकान आग की चपेट में आने से तप गया। मकान से महिलाओं को निकाला गया। सुरेंद्र का बेटा विकास भी आग को बुझाने में सिविल डिफेंस के साथ लगा रहा। लोगों ने पुलिस और प्रशासन के रेस्पांस पर नाराजगी जताई है। इसकी शिकायत अधिकारियों से भी की।

मेडिकल में आग बुझाने का प्रोजेक्ट ठप, जंग खा रहे पाइप
मेरठ।
मेडिकल कॉलेज में आग बुझाने का प्रोजेक्ट ठप पड़ा है। 10 जून 2016 को शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 30 सितंबर 2018 तक पूरा होना था, लेकिन अभी तक सिर्फ 16 फीसदी कार्य ही पूरा हो पाया है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में आग से सुरक्षा को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं।

इस प्रोजेक्ट की लागत चार करोड़ 81 लाख 94 हजार रुपये है। एक करोड़ 92 लाख 77 हजार रुपये की धनराशि अवमुक्त कर दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कार्य बीच अधूरा है। मेडिकल कॉलेज में हर साल 30 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती होते हैं। इसके अलावा हर रोज तीन हजार के करीब मरीज ओपीडी में आते हैं। ओपीडी में आने वाली संख्या सालभर में साढ़ छह लाख से ज्यादा हो जाती है। इनके अलावा तीमारदार, मेडिकल स्टूडेंट्स, फैक्लटी और अन्य स्टाफ भी यहां रहता है।
मेडिकल कॉलेज केप्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि फायर फाइटिंग का कार्य कार्यदायी संस्था द्वारा निष्पादित न किए जाने के कारण कार्य रुका हुआ है। इसे शुरू कराने की कोशिश की जा रही है।

कुछ पाइपों को लगा जंग, कई चोरी
इस
प्रोजेक्ट के तहत पूरे कॉलेज व अस्पताल को कवर किया जाना था। प्रोजेक्ट के तहत काफी संख्या में पाइप मंगाए गए थे, लेकिन आधी पाइपलाइन बिछाकर ही इसे बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया। खुले में पड़े पाइपों में जंग लग चुका है, जबकि कई पाइप चोरी भी हो गए हैं। इतने बड़े प्रोजेक्ट पर कॉलेज और अस्पताल प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। यहां बिजली की वायरिंग बेहद पुरानी और जर्जर हैं। इस कॉलेज में फिलहाल आग बुझाने के इंतजाम नाकाफी हैं।

1966 के बाद नहीं हुआ रीवायरिंग का काम
मेडिकल
कॉलेज 155 एकड़ में फैला है। यहां सिर्फ 200 अग्निशमक यंत्र ही हैं। इसमें करीब 150 सिलेंडर एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक व पुरानी बिल्डिंग में लगे हैं, जबकि करीब 50 नई इमरजेंसी में। कई जगह फायर अलार्म भी खराब हैं। 1966 केबाद से यहां रीवायरिंग का काम नहीं हुआ है, जबकि कई विभागों में पुराना लकड़ी का फर्नीचर आदि आसानी से जलने वाला सामान इधर-उधर पड़ा है।

पांच जिले की दमकल ने फेंका 15 लाख लीटर पानी   
फैक्टरी
में सुबह 8:30 बजे लगी आग शाम 7:30 बजे तक सुलगती रही। फैक्टरी में अंदर-अंदर आग फैलती रही और पांच जिले की फायरब्रिगेड बाहर से पानी फेंकती रही। सारा सामान जलने के बाद आग धीमी पड़ी। मौके पर पहुंचे डीएम व एसएसपी ने रिहायशी इलाके में स्पोर्ट्स फैक्टरी चलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्थानीय लोगों का साहस भी बंधाया। दमकल वाहन अंदर नहीं जा पाए तो लगातार पाइपों के जरिये पानी फैक्टरी तक पहुंचाया गया। फायरब्रिगेड ने बताया कि करीब 150 गाड़ियां में भरकर पानी आया। एक गाड़ी में औसतन 10 हजार लीटर पानी आता है। इस हिसाब से 15 लाख लीटर पानी फेंका गया।

जूझे फायरकर्मी, नहीं हटी रैक
एफएसओ
संजीव कुमार ने बताया कि आग बुझाने में फायरकर्मियों को काफी परेशानी आई। मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और बागपत से फायरकर्मियों को बुलाया गया था। तंग गली होने के चलते आग को ठीक से कवर नहीं किया जा सका। दूर से पाइपों के जरिये पानी लाया गया। इस कारण आग बुझाने में 11 घंटे लगे।  उन्होंने बताया कि फैक्टरी के गेट से थोड़ा हटके रैक लगी हुई थी, जिसमें लोवर और टी-शर्ट थी। पानी लोहे की रैक पर जाता रहा और आग अंदर अंदर सुलगती रही। आग कम होने पर रैक को हटाया गया। तब जाकर आग पूरी तरह बुझी। सुरक्षा की दृष्टि से आसपास के मकानों को कवर किया गया था। फैक्टरी के अलावा दूसरा नुकसान फायरकर्मियों ने बचा लिया।

कई बार खत्म हुआ पानी
आग
बुझाने के दौरान कई बार पानी खत्म हुआ। पानी खत्म होने ही आसपास के लोग चिल्लाने लगते थे। मेरठ फायरब्रिगेड की 15 गाड़ियां लगी थीं। पुलिस लाइन के अलावा दूसरी जगहों से भी पानी लाने की व्यवस्था थी। इसके बावजूद पानी की परेशानी आती रही।

बिल्डिंग में दरार, खतरे में लोग
फैक्टरी
की बिल्डिंग में चारों तरफ से दरार आ गई। इसको लेकर आसपास के लोगों को खतरा बना है। लोगों ने बताया कि पांच-छह साल से रिहायशी इलाके में फैक्टरी चल रही है। इसकी कोई जांच करने नहीं आया। अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि इस फैक्टरी की एनओसी नहीं है।

फायरब्रिगेड ने काफी मशक्कत करने के बाद आग पर काबू पाया है। तंग गली व रिहायशी इलाके में फैक्टरी चलने की जांच प्रशासन करेगा। फायरब्रिगेड द्वारा फैक्टरी मालिक को नोटिस भेजा जाएगा। मानकों के विरुद्ध चलने वाली फैक्टरी या कोचिंग सेंटरों की जांच कर कार्रवाई कराई जाएगी।
प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन


मेरठ में आग की बड़ी घटनाएं
28 मई 2019
: विकास भवन के डीपीआरओ ऑफिस में आग से सारा रिकॉर्ड व कंप्यूटर जले।
11 मार्च 2019 : लिसाड़ीगेट में मूर्ति बनाने की फैक्ट्री में भीषण आग लगी।
25 मार्च 2018 : हापुड़ रोड पर आग से 300 से ज्यादा झुग्गी झोपड़ी जलकर राख हुईं।
22 अप्रैल 2018 : हापुड़ रोड पर 100 से ज्यादा झुग्गी झोपड़ी आग से जलीं।
26 मई 2018 : किनौनी शुगर मिल में अल्कोहल के बड़े टैंको में आग लगी। दो दिन में पांच जिलों की फायर टीम ने आग पर काबू पाया।




आग से बचाव के लिए यह बरतें सावधानी
-बिस्तर
पर लेटकर धूम्रपान न करें, हुक्का पीने के बाद चिलम की आग बुझा दें।
-जलती हुई बीड़ी या सिगरेट के टुकड़े को पैर से कुचलकर नष्ट करें।
-बिजली की लाइन का तार टूटने पर बिजली विभाग को सूचना दें।
-बिजली की लाइन या ट्रांसफर के पास सूखा कूड़ा एकत्र न होने दें।
-चूल्हे के ईंधन की आग को पूरी तरह से बुझाएं।
पशुओं को लोहे की जंजीरे से न बांधें।
घर से बाहर जाएं तो बिजली के उपकरण बंद करके जाएं।
रसोई की छत टीन से बनाएं।
किसी भी त्योहार पर आतिशबाजी का प्रयोग न करें।
हवा चलने की स्थिति में हवा के विपरीत दिशा से आग बुझाएं।
आग लगने पर महिला, बच्चों व वृद्घ लोगों को सामने न आने दें।
उपयोग न होने पर गैस सिलिंडर का रेग्यूलेटर बंद करके रखें।
फैक्ट्री से बाहर जाएं तो बिजली के उपकरण पूरी तरह से बंद करें।

101 पर दें सूचना
सीएफओ
अजय कुमार शर्मा का कहना है कि आग लगने पर तत्काल 101 पर सूचना दें। पुलिस कंट्रोल रूम 100 नंबर पर भी सूचना दे सकते हैं। फायर ब्रिगेड सूचना मिलने के बाद तत्काल मौके पर पहुंचती है।

एमडीए और नगर निगम को चिट्ठी लिखी गई है। दूसरे जगह चल रही रिहायशी इलाके में फैक्टरी की रिपोर्ट भी मांगी गई है। इस फैक्टरी मालिक पर कार्रवाई की जाएगी। जवाब मांगा गया है।
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अनिल ढींगरा, डीएम
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