इस बार तापमान सामान्य से अधिक होने की वजह ला-नीना है। इसके कारण वैश्विक स्तर पर तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यही कारण है कि तापमान बढ़ते ही इस बार सबसे अधिक आंधी और तूफान आ रहे हैं। इसका असर आने वाले दिनों में भी बना रहेगा। साथ ही इस बार मानसून भी अच्छा रहेगा।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि ला-नीना का असर फिर से सक्रिय हो गया है। जिस कारण दिन का तापमान सामान्य से ऊपर चल रहा है। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि ला-नीना के असर से मौसम शुरू से ही चेंज चल रहा है। फिलहाल मौसम ऐसा ही बना रहेगा। दरअसल जिस साल ला-नीना का असर होता है, उस साल भारत में गर्मी अधिक रहती है और आंधी, तूफान भी अधिक आते है। इनका खतरा हर समय बना रहता है। जैसे गर्मी बढ़ती है और लो प्रेशर बनकर तैयार होता है तो आंधी तूफान आ जाता है। ला-नीना का असर मेरठ ही नहीं आसपास के जिलों और वेस्ट यूपी में भी दिखाई दे रहा है। जिसके चलते जल्दी-जल्दी आंधी तूफान आ रहे हैं और गर्मी भी बढ़ रही है।
भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एन. सुभाष का कहना है कि चौबीस घंटे में फिर से एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है, जिससे एनसीआर और वेस्ट यूपी में में आंधी और बारिश के आसार बने हुए हैं। कुछ स्थानों पर गरज के साथ बूंदाबांदी भी हो सकती है। आने वाले 48 से 72 घंटे तक मौसम का मिजाज बदला- बदला दिखेगा।
समुद्र के तापमान में बढ़ोतरी से बनता है लानीना
मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार समुद्र का तापमान वैश्विक स्तर पर बढ़ने से ला-नीना की स्थिति बनती है। इस समय पेरू के समुद्र में अलनीना की स्थिति बनी हुई है। उसके असर से ही इस बार गर्मी अधिक रहेगी और मानसून भी सामान्य रहेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार ला-नीना के असर से मौसम का चक्र प्रभावित हो जाता है। जिस कारण जहां बरसात के मौसम में बारिश तो सर्दी के मौसम में ठंड का दौर प्रभावित हो जाता है।
क्या है ला-नीना
ला-नीना स्पैनिश भाषा का शब्द है। जिसका अर्थ है शिशु यानी छोटा बालक। वैज्ञानिक अर्थ में ला-नीना प्रशांत महासागर के भूमध्यीय क्षेत्र की उस समुद्री घटना का नाम है जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित इक्वाडोर और पेरू देशों के तटीय समुद्री जल में कुछ सालों के अंतराल पर घटित होती है। इससे समुद्र के सतही जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। ला-नीना के रहने से भारतीय भूभाग में आंधी और तूफान की संभावना अधिक रहती है।
जल्दी शुरू हो जाती है गर्मी
इस बार अल-नीना का असर रहा तो सर्दी में भी गर्मी का असर जल्दी शुरू हो गया था। फरवरी से लेकर अप्रैल और मई तक का मौसम इतना गर्म चल रहा है। जिन दिनों में मौसम सामान्य होना चाहिए, उन दिनों में गर्मी का असर बना रहता है। यही कारण रहा कि इस बार सर्दी का असर भी बहुत कम दिखाई दिया। अब इसके सक्रिय होने से आंधी और तूफान ने फिर से परेशानी बढ़ा दी है।