शहर से प्रतिदिन निकलने वाले 900 मीट्रिक टन कूड़े का कोई निस्तारण नहीं हो सका है। कूड़ा कभी कहीं तो कभी कहीं डाला जा रहा है। अब गांवड़ी में लगने वाले कूड़ा निस्तारण प्लांट की डीपीआर में परिवर्तन किया जा रहा है। अफसरों का कहना है कि कुछ बिंदुओं में बदलाव जरूरी है। महाराष्ट्र की कंपनी को साथ लेकर एक जनवरी को भूमि पूजन भी किया गया, लेकिन एक साल में काम शुरू नहीं हो सका। कूड़ा निस्तारण को लेकर एनजीटी और हाईकोर्ट में नगर निगम प्रशासन को फटकार लग चुकी।
कूड़ा निस्तारण प्लांट पर आएगी 250 करोड़ की लागत
शहर से निकलने वाले कूड़े के लिए किला रोड पर गांवड़ी के जंगल में डंपिंग ग्राउंड बनाया हुआ है। आर्गेनिक रिसाइक्लिंग सिस्टम लि. की रिपोर्ट के अनुसार कूड़ा निस्तारण प्लांट पर 250 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। धन की व्यवस्था हो चुकी है, लेकिन अब नगर निगम प्रशासन और कंपनी की शर्तों को लेकर विवाद चल रहा है।
न्यायालय तक पहुंचा मंगतपुरम में कूड़े का मामला
दिल्ली रोड स्थित मंगतपुरम में नगर निगम की खाली पड़ी भूमि पर पिछले काफी समय से शहर का कूड़ा डाला जा रहा है। यहां कूड़े की पहाड़ियां बन गयी हैं। नूरनगर रोड, हापुड़ रोड, बाईपास, किला रोड, काली नदी किनारे आदि स्थानों पर खुले में कूड़ा डाला जा रहा है। शहर में दिल्ली रोड पर मंगतपुरम में कूड़े की पहाड़ियों का मामला एनजीटी ही नहीं बल्कि हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। न्यायालय नगर निगम प्रशासन ने जवाब तलब कर चुका है। लेकिन निगम प्रशासन ने अपनी जान बचाने के लिए न्यायालय में कूड़ा निस्तारण संबंधी शपथ पत्र दाखिल किए हैं। किला रोड स्थित गांवड़ी के जंगल में भी नगर निगम की जमीन पर कूड़े की पहाड़ियां बन गयी हैं।