अच्छी खुराक की कमी के चलते ग्रामीण बच्चे ही कुपोषण और एनीमिया के शिकार नहीं हो रहे हैं, शहरी बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। महंगे निजी स्कूलों, केंद्रीय विद्यालयों के बच्चों की हालत बहुत खराब है। यह सच स्कूलों में हुए बच्चों के रुटीन चेकअप में सामने आया है। जंक फूड खाने से बच्चों की सेहत खराब होती जा रही है।
प्राइवेट स्कूलों में हर माह रुटीन चेकअप होता है। इसमें छात्र की ग्रोथ से लेकर हाइट, वेट की जांच की जाती है। चिकित्सक टीम के सदस्यों ने बताया कि बच्चों की स्वास्थ्य रिपोर्ट चौंकाने वाली आई हैं। अधिकांश छात्र कुपोषण के शिकार मिले हैं। यह बीमारियां खानपान ठीक न होने के कारण होती हैं। अच्छे स्कूलों के बच्चों में ये कमियां मिलना चिंता का विषय है। एक स्कूल में 15 प्रतिशत बच्चे कुपोषण, दस प्रतिशत बच्चे एनीमिया के शिकार मिले हैं। इसके अलावा भी बच्चे अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं।
जंक फूड ने बिगाड़ी सेहत
बच्चों में बीमारियों का बड़ा कारण जंक फूड, लो प्रोटीन डाइट है। दांतों में कैविटी, कम उम्र में चश्मे का नंबर बढ़ना, हाईपरटेंशन, क्रोनिक इनफ्लेमेशन, टाइप टू डायबिटीज, ओबेसिटी, अंडरवेट, डिस्मनोरिया, एनीमिया और पेट में कीड़े की शिकायत आ रही है। गांव के स्कूल ही नहीं शहरी स्कूलों के बच्चों के पेट में कीड़ों की शिकायत मिल रही है।
स्मोकिंग, प्रजेंटिंग डिसऑर्डर चिंता का विषय
स्कूली बच्चों में महज फिजिकल प्रॉब्लम नहीं, बल्कि साइकलोजिकल समस्याएं बढ़ी हैं। सातवीं कक्षा से ही बच्चों में स्मोकिंग की आदत तेजी से बढ़ी है। शहर-गांव दोनों के बच्चों में यह समस्या मिल रही है। लुक्स डिसऑर्डर भी लड़कियों में काफी बढ़ने लगा है। पुअर बॉडी इमेज के कारण डिप्रेशन भी है। 10वीं के छात्रों में अपोजिट जेंडर अटरेक्शन संबंधित मानसिक समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
7 या 15 दिन में ही एक बार बच्चे को फास्ट फूड दें।
बच्चों की सेहत के लिए मार्केट का पैक्ड फूड न दें।
बच्चे को रोजाना डेढ़ से दो घंटे वर्कआउट कराएं।
हेल्दी फूड की खासियत बच्चों को बताएं।
बच्चे योग, स्पोर्ट्स में भाग लें। दौड़, क्रिकेट, वॉलीबाल, फुटबाल, एथलेटिक्स में जाएं।