कोहरे से दिन का पारा गोता खा रहा है। एक दिन पहले की अपेक्षा सात डिग्री सेल्सियस तापमान गिरा है। इससे दिन में ठिठुरन बढ़ने लगी है। दोपहर 12 बजे तक भी हाईवे पर वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों की मानें तो अभी कोहरे का असर कई दिन रहेगा। शाम को छह बजे से कोहरे का असर फिर दिखाई देने लगा था। रात दस बजे तो घना कोहरा छा गया था।
कोहरे की मार से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। देर शाम से शुरू होकर कोहरा अगले दिन दोपहर तक छाया रहता है। शनिवार दोपहर करीब 1 बजे धूप निकलने पर सर्दी से थोड़ी राहत मिली। कोहरे के बीच दिन में चली शीत लहर से सर्दी और बढ़ गई। मौसम कार्यालय पर अधिकतम तापमान 16.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 10.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अधिकतम आर्द्र्रता 97 और न्यूनतम 89 प्रतिशत दर्ज की गई। एक दिन पहले की अपेक्षा दिन के तापमान में सात डिग्री की गिरावट और रात के तापमान में करीब 3 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एन सुभाष का कहना है कि अभी दो तीन दिन तक कोहरे का असर रहेगा। दिन का तापमान 15 डिग्री के आसपास रहेगा, जबकि रात का तापमान अभी 5 और 6 डिग्री के आसपास आ सकता है।
पिछले छह दिन का तापमान
तिथि अधिकतम न्यूनतम
5 25.6 9.6
6 15.5 10.2
7 19.2 10.7
8 19.1 7.5
9 23.0 6.4
10 16.3 10.0
(नोट: तापमान डिग्री सेल्सियस में)
तापमान में गिरावट और बढ़ता कोहरा सेहत के लिए खतरे की घंटी
बढ़ती सर्दी सेहत के लिए भी खतरनाक है। अगर ठंड में आपने जरा सी लापरवाही कर दी तो बीमार हो सकते हैं। इसलिए विशेष तौर पर सावधान रहने की जरूरत है। हाई ब्लड प्रेशर व अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम खतरनाक है। बच्चों को भी बचाने की जरूरत है।
माना जाता है कि सर्दी में खासी और जुकाम के मरीज बढ़ जाते हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि बीपी, अस्थमा के मरीजों की संख्या इस मौसम में अधिक बढ़ती है। उनके लिए यह मौसम सबसे रिस्क वाला माना गया है। इतना ही नहीं ब्रेन स्ट्रोक होने के मामले भी बढ़ जाते हैं। लकवे पड़ने का भी खतरा रहता है।
अस्पतालों में बढ़ने लगी मरीजों की संख्या
सरकारी अस्पताल से लेकर निजी अस्पताल और क्लीनिक पर ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ गई है। कुछ अस्पताल में बेड खाली नहीं हैं। आईसीयू में अधिक मरीज भर्ती हैं। एक हफ्ते में मरीजों की संख्या बढ़ी है।
शुगर व बीपी के मरीज के लिए खतरा
वरिष्ठ न्यूरो फिजीशियन डॉ. भूपेंद्र चौधरी कहते हैं कि ठंडे के मौसम में ब्लड गाढ़ा हो जाता है। शरीर की नसें सिकुड़ने लगती हैं, इससे बीपी बढ़ना लाजमी है। जो लोग पहले से बीपी या शुगर के मरीज हैं, उनके लिए ऐसा मौसम सबसे ज्यादा खतरनाक है। हार्ट व ब्रेन स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। बीते एक हफ्ते के अंदर ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है, हमारे यहां पर आईसीयू में जगह खाली नहीं हैं।
ये बरतें सावधानी
- ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनें
- शरीर का तापमान सही बनाये रखने के लिए गर्म पेय पदार्थों को सेवन करें
- ठंडे के मौसम में सुबह और शाम न टहलें
- धूप निकलने पर टहलें और धूप भी लें
- नियम तौर पर अपना शुगर और बीपी चेक कराते रहें
- अगर कोई दिक्कत बढ़े तो चिकित्सक की सलाह से इलाज लें
बच्चों में निमोनिया, डायरिया बढ़ा
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित उपाध्याय कहते हैं कि जो बच्चे प्री-मिच्योर हैं उनके लिए सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। क्योंकि ऐसी बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम होती है। इसके साथ ही तापमान गिरने पर बच्चों में एलर्जी बढ़ जाती है। इससे सर्दी, खासी जुकाम के साथ ही निमोनिया की शिकायत बढ़ रही है। कोल्ड डायरिया के केस सामने आ रहे हैं।
उपाय
- बच्चों के कमरे का तापमान सामान्य रखें
- बच्चों को बाहर ले जाने से बचें
- पांच साल तक के बच्चों की विशेष तौर पर ध्यान रखने की जरूरत
- एलर्जी के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सक को दिखाएं
- बच्चों को उबला हुआ गुनगुना पानी ही पिलाएं
अस्थमा, सांस के रोगी अलर्ट रहें
वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर कहते हैं कि कोहरा व ठंड के चलते सांस के मरीज बढ़े हैं। कई मरीज को अस्थमा अटैक तक की शिकायत आई है। कुछ मरीजों को आईसीयू में भरने की नौबत आई है। क्योंकि कोहरा जब धुंध व धूल के संपर्क में आता है तो स्मोक बनाता है। ऐसे में अगर कोई अस्थमा या सांस की किसी अन्य बीमारी से पीड़ित है तो उसे कोहरे के संपर्क में आने पर सांस लेने में समस्या खड़ी हो जाती है।
उपाय
- कोहरे में घर से बाहर निकलने से परहेज करें
- अस्थमा व सांस की अन्य बीमारी के मरीज नियमित तौर पर इन्हेलर लें
- शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए सूप, चाय व अन्य गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें
- ठंडे से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनें
सामान्य लोग भी बरते एहतियात
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. तनुराज सिरोही कहते हैं कि मौसम बदलने के बाद वायरल इंफेक्शन के मामले बढ़े हैं। खासकर गले में एलर्जी व खांसी की शिकायत के मरीज ज्यादा हैं। क्योंकि मौसम बदलने पर नए प्रकृति का बैक्टीरिया पैदा होता है, जिसके संपर्क में आने से ठंड लगने पर एलर्जी, बुखार व डायरिया की समस्या बढ़ जाती है।
उपाय
सर्दी के मौसम में बासी भोजन न खाएं
- ठंड से बचने के लिए भरपूर गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें
- ऐसे मौसम में नियमित तौर पर गुनगुने पानी की सेवन करें
- रात के समय हल्के खाद्य पदार्थों का सेवन करें
- एक टाइम पर भरपेट खाने से परहेज करें