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ज्ञान से ही होती है कर्म की सिद्धि : स्वामी अनंतानंद

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मेरठ। गढ़ रोड स्थित लखमी विहार कॉलोनी में सात दिवसीय गीता ज्ञान यज्ञ सप्ताह का समापन हो गया। अंतिम दिन स्वामी अनंतानंद सरस्वती ने श्रीमद्भागवत के अध्याय चार का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान से ही कर्म की सिद्धि होती है। केवल कर्म करने वाले और प्रारंभ किए गए कर्म को पूर्ण न करने वाले दोनों को ही ज्ञान सिद्धि प्राप्त नहीं होती है।
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अनंतानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन का लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है। पुनर्जन्म में भी हमारे कर्म ही सामने आते हैं। पांच भौतिक शरीर आत्म सत्ता द्वारा चैतन्य होकर वैसे ही कार्य करता दिखता है, जिस प्रकार ईंधन से वाहन क्रियाशील होता है। सभी क्रियाओं में अक्रिय आत्मसत्ता को देखना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि साधक गुणातीत अवस्था तक पहुंचने का प्रयास करे। अवतारवाद, पुनर्जन्म एवं वर्ण व्यवस्था इसीलिए बनाई गई हैं। जब तक आत्मतत्व में रति, तृप्ति और संतुष्टि न हो जाए तब तक सत्संग करते रहना चाहिए। प्रवृत्ति और निवृत्ति दोनों ही ईश्वर को अर्पित होने चाहिए।
महाराजश्री ने ब्रह्म यज्ञ, देव यज्ञ, आत्मसंयम यज्ञ, योग यज्ञ, तप यज्ञ, द्रव्य यज्ञ, प्राण यज्ञ आदि के बारे में बताया। यज्ञ कर्मपरक हैं परंतु सभी यज्ञों में ज्ञान यज्ञ श्रेष्ठ है। यज्ञ विहीन व्यक्ति को न इस लोक में और न परलोक में सुख मिलता है। ममता त्यागकर कर्म करने वाले का प्रत्येक कर्म यज्ञ के समान हो जाता है। अग्नि देवों का मुख है। यज्ञ करना हो तो यज्ञ में प्रयुक्त होने वाले द्रव्य भी शुद्ध होने चाहिए। यज्ञ साक्षात ईश्वर का स्वरूप हैं। यज्ञ के माध्यम से संकल्प दृढ़ होते हैं।
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उन्होंने सनातन धर्म के सभी अनुयायियों से अपील की कि सभी को प्रतिदिन अपने घरों में सामूहिक रुप से किसी न किसी शास्त्र के दैनिक स्वाध्याय की परंपरा स्थापित करनी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में सभी ने परंपरानुसार व्यास पूजन और आरती की। व्यास पूजन सत्येंद्र नेगी और चंद्रकांता नेगी ने किया। इस अवसर पर पंकज त्रिवेदी, कौशल महर्षि, सूरज अग्रवाल, विमला अग्रवाल, विजय अरोरा आदि मौजूद रहे।
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