पश्चिमी यूपी में होगा किसान आंदोलन का जमीनी परीक्षण
मेरठ। कृषि कानूनों के विरोध में जारी किसान आंदोलन के बीच होने जा रहे पंचायत चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में घमासान तय है। पंचायत चुनाव में किसान आंदोलन के साथ-साथ प्रदेश सरकार के चार साल के कार्यकाल का जमीनी परीक्षण होगा।
किसान आंदोलन का सर्वाधिक असर जहां इसी इलाके में है, वहीं विपक्ष की ओर से केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार की घेराबंदी की भी खास तैयारी की गई है। 2022 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे इस चुनाव में रालोद और सपा किसानों और ग्रामीणों के सहारे है, जबकि बसपा को कैडर का भरोसा है। वहीं भाजपा ने आक्रामक प्रचार के लिए मंत्रियों, विधायकों के अलावा पार्टी पदाधिकारियों को उम्मीदवारों की मदद के लिए बूथ स्तर तक सक्रिय कर दिया है।
पश्चिम में किसान आंदोलन के अलावा गन्ना बकाया और तीन साल के गन्ना मूल्य न बढ़ना भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। किसान आंदोलन में पश्चिमी यूपी की मजबूत भागीदारी के मद्देनजर अगले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी, रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पश्चिमी यूपी के लगभग सभी जिलों में किसान महापंचायतें कर इस मुद्दे को धार दी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की भी इसी क्षेत्र पर निगाह है। विपक्षी दलों का सारा दारोमदार भाकियू के रुख पर भी टिका हुआ है।
इन हालात में भाजपा ने कृषि कानूनों पर उठाए जाने वाले सवालों के जवाब देना तो तय कर लिया है लेकिन उसका ज्यादा फोकस चुनाव को विकास के मुद्दे पर लाने का है। यही नहीं, भाजपा ने नया नेतृत्व विकसित करने के लिए जिला पंचायत के वार्ड स्तर से लेकर ब्लॉक और गांव स्तर पर युवाओं, दलितों और महिलाओं की टीम बना दी है।
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विपक्ष मजबूती से उठाएगा सवाल
- कृषि कानूनों से क्या फायदा होगा? न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी क्यों नहीं दी जा रही?
- पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के साथ-साथ बिजली बिल लगातार क्यों बढ़ाए जा रहे हैं?
- बेरोजगारी खत्म करने का वादा पूरा नहीं होने से युवा वर्ग पलायन कर कहां चला जाए ?
- कानून-व्यवस्था खराब हो रही है। अधिकारी जनता की शिकायतों की अनदेखी कर रहे हैं?
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सत्ता पक्ष देगा संभावित जवाब
- गन्ना मूल्य का सबसे ज्यादा भुगतान भाजपा की सरकार बनने के बाद किया गया है
- केंद्र की किसान निधि से मिली राशि से ग्रामीण क्षत्रों की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई
- कोरोना काल में जरूरतमंदों को आवाजाही से लेकर खाद्यान्न की कमी नहीं होने दी
- वरासत के सबसे ज्यादा मामले निस्तारित हुए। घरौनी की व्यवस्था लागू की गई है
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उपलब्धियों के सहारे करेंगे परास्त
हम कार्यकर्ताओं को मजबूती से चुनाव लड़ाएंगे। योगी सरकार की उपलब्धियां इतनी ज्यादा हैं कि विपक्ष के उम्मीदवारों का हमारे मुकाबले परास्त होना तय है।
- विजय बहादुर पाठक, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और पंचायत चुनाव प्रभारी
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मौके का इंतजार कर रहे ग्रामीण
गांवों के लोगों में सरकार के खिलाफ गहरी नाराजगी है। लोग जवाब देने के लिए तैयार हैं। सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किए बिना भाजपा जीतने वाली नहीं।
- चौधरी यशवीर सिंह, हस्तिनापुर क्षेत्रीय अध्यक्ष, रालोद
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