रोहटा। बजाज शुगर मिल इकाई किनौनी के प्रमुख केपी सिंह ने बताया कि क्षेत्र की मुख्य फसल गन्ना है, जो मिल परिक्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत भूमि पर बोई जाती है। अक्सर किसान गन्ने की सूखी पत्तियों को खेत में आग लगाकर नष्ट कर देते हैं। इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मिल परिक्षेत्र के गांव रसूलपुर के प्रगतिशील किसान दिनेश कुमार के खेत में गन्ने की सूखी पत्तियों को मशीन द्वारा बंडल बनाकर एकत्र करने का सफल प्रयोग किया गया। इन सूखी पत्तियों के बंडल को ईंधन के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। यूनिट हेड ने बताया कि यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होती है। पहले चरण में मशीन खेत में बिखरी पत्तियों को इकट्ठा करती है और दूसरे चरण में इन्हें आकर्षक व सघन बंडलों में परिवर्तित करती है। इसकी कीमत लगभग 20 लाख रुपये है। इस संबंध में अधिक जानकारी गन्ना कार्यालय, चीनी मिल से प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वह किसी भी स्थिति में सूखी पत्तियों को न जलाएं और पर्यावरण संरक्षण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।