जांच में यह भी सामने आया है कि मेरठ निवासी अंकित इस पूरे नेटवर्क के लिए अलग-अलग नामों से वाहन बुक करता था। वह डॉ. रोहित, वैभव मुद्गल, डॉ. अफजल, डॉ. मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली और डॉ. अनुराग समेत गिरोह के अन्य सदस्यों के लिए गाड़ियों की व्यवस्था करता था। अलग-अलग नामों से गाड़ी बुक कराने की वजह से गिरोह की गतिविधियां गुप्त बनी रहती थीं और उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।
पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि परवेज सैफी डॉ. रोहित की टीम को तीन बार मेरठ से कानपुर लेकर आया था। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है।
एंबुलेंस चालक ने डॉक्टर बनकर की थी जांच
इस मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आठवीं पास एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल ने खुद को डॉक्टर बताकर दक्षिण अफ्रीका की एक महिला मरीज की स्वास्थ्य जांच की थी। पुलिस को शिवम के मोबाइल फोन से एक फोटो भी मिली है, जिसमें वह महिला की जांच करता दिखाई दे रहा है।
पुलिस ने इस मामले में आहूजा हॉस्पिटल के मालिक सुरजीत सिंह आहूजा और उनकी पत्नी प्रीति आहूजा के साथ-साथ दलाल एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल और तीन अन्य अस्पताल संचालकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
जांच एजेंसियां अब इस पूरे किडनी रैकेट नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।