मोबाइल से भी दिव्यांग अपना फार्म ऑनलाइन भर सकते हैं। इसके बाद आवेदक को मेसेज आएगा। उसमें मेडिकल टेस्ट का दिन और तारीख लिखी होगी। निर्धारित तिथि को पहुंचकर दिव्यांग अपनी मेडिकल जांच कराएंगे और इसके बाद स्मार्ट कार्ड जारी कर दिया जाएगा। ऐसे में दिव्यांगों को काफी सहूलियत हो जाएगी।
कुछ लोग जन्म से दिव्यांग होते हैं तो कुछ दुर्घटनाओं में घायल होने के कारण अपंग हो जाते हैं। जो व्यक्ति शारीरिक रूप से काम करने में सक्षम नहीं होते हैं उनके लिए शासन द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाई जाती हैं। इन योजनाओं का लाभ देकर दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रमाण पत्र दिया जाता है। दिव्यांगों को इस कार्ड पर ट्रेन, बसों में फ्री यात्रा करना और पेंशन का लाभ मिलना शामिल हैं। यदि व्यक्ति 40 से 79 फीसदी तक दिव्यांग है तो वह ट्रेन और बस में निशुल्क यात्रा कर सकता है। 80 से 100 प्रतिशत तक हेल्पर को भी करीब 50 प्रतिशत छूट मिलती है।
जिले में करीब 36 हजार विकलांग हैं। इनमें करीब सात हजार बच्चे शामिल हैं। प्रत्येक सोमवार को मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। पहले दिव्यांग को स्वयं कार्यालय में आकर फार्म भरना पड़ता था। लेकिन अब इस प्रक्रिया में शासन स्तर से बदलाव किया गया है।
अब दिव्यांगजन घर बैठे ही मोबाइल से भी अपना फार्म ऑनलाइन भर सकते हैं। इसके बाद निर्धारित तिथि को सीएमओ कार्यालय पहुंचकर मेडिकल जांच कराने के बाद दिव्यांग स्मार्ट कार्ड दे दिया जाएगा। सीएमओ राकेश कुमार मित्तल ने बताया कि दिव्यांग स्मार्ट कार्ड बनाने की जिम्मेदारी भारत सरकार ने तमिलनाडू की वर्सटाइल नामक कंपनी को सौंपी है। उसी कंपनी के आधार कार्ड कंपनी को दिए जाएंगे।
खो जाने पर दोबारा बन सकता है स्मार्ट कार्ड
दिव्यांग स्मार्ट कार्ड के एक बार खो जाने पर विभाग की वेबसाइट पर कार्ड का नंबर डालकर दोबारा से निकलवाया जा सकता है।
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