गंगा की बाढ़ में कट गए किसानों के खेत, जुताई के लिए बचे न नपाई के लिए
रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर (मेरठ)। खादर क्षेत्र के हजारों किसानों की पीड़ा पहाड़ों से बहकर आए पानी से अब पहाड़ की तरह विकराल हो गई है। जिन खेतों में किसानों की फसल लहलहाती थी वहां पर अब गंगा नदी बह रही है। बाढ़ के बाद जब किसान अपने खेतों को देखने के लिए पहुंचे तो यहां उनके खेत जुताई के लिए बचे, न नपाई के लिए।
अक्तूबर माह में गंगा नदी का जलस्तर कम हो जाता है और गंगा अपने सीमित क्षेत्र में पहुंच जाती थी। पानी कम होने के बाद किसान इन दिनों फिर से जुताई-बुआई शुरू कर देते थे। मगर इस बार की बाढ़ किसानों को दर्द देने वाली रहीं। गांव बस्तोरा नारंग के सैकड़ों किसानों को तलाशने पर भी खेत में खड़ी फसल तो क्या खेत भी नहीं मिले। जबकि गत वर्षों में बाढ़ के बाद खादर क्षेत्र में किसान लेखपाल द्वारा नपाई के बाद फसलों की बुवाई शुरू कर देते थे। परंतु इस बार अन्नदाताओं के खेत न जुताई के लिए बचे न नपाई के लिए। उनके पास अपनी लगानी भूमि का राजस्व रिकॉर्ड और खसरा, खतौनी ही रह गए हैं।
बस्तोरा नारंग के किसान राजू चौहान ने बताया कि उनका 20 बीघा का खेत पूरी तरह गंगा नदी में बह गया। किसान शिवकुमार, इंद्रजीत सिंह, प्रेम सिंह, विजयपाल ठाकुर आदि ने बताया कि गांव की हजारों हेक्टेयर भूमि गंगा में समा गई है। वहीं कुछ किसानों के आधे खेत नदी की धारा में समा गए। जबकि इस समय फसल कटनी होती थी लेकिन अब किसानों को खेत ढूंढ़ने पर भी नहीं मिल रहे हैं। (संवाद)
सबसे ज्यादा नुकसान बस्तोरा में हुआ
अगस्त महीने में आई बाढ़ में सबसे ज्यादा नुकसान बस्तोरा गांव में हुआ है। जहां करीब 150 किसानों परिवार प्रभावित हुए हैं। करीब 100 से अधिक हेक्टेयर भूमि गंगा में कट गई। इससे गंगा ने यहां के किसानों को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।
फसल का मुआवजा मिला, खेत का नहीं
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मुआवजे की पहली किस्त किसानों के खाते में पहुंच चुकी है। मुआवजा तीन किस्तों में किसानों के खाते में पहुंचेगा। स्थानीय किसानों ने बताया कि जो फसल और खेत बाढ़ में बह गए हैं प्रशासन द्वारा अभी कुछ किसानों को फसलों का ही मुआवजा दिया गया है, जबकि जमीन का मुआवजा अभी उन्हें नहीं मिला। इससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। सरकार को जमीन का मुआवजा भी देना चाहिए।
शासन को भेजी गई है रिपोर्ट
खादर क्षेत्र में बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे कराकर रिपोर्ट शासन को भेजी गई है, जिसमें से कुछ किसानों को फसल का मुआवजा मिल गया है। बाकी को जल्द मिलेगा। निर्देश मिलते ही गंगा में कटी भूमि का भी सर्वे कराया जाएगा। -सूर्यकांत त्रिपाठी, एडीएम वित्त एवं राजस्व
बस्तोरा नारंग में गंगा गंगा किनारे खड़े होकर अपने कटे हुए खेतो को देखते किसान स्रोत संवाद