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खाकी का 30 किमी का चक्रव्यूह तोड़ भागा कुख्यात मोनू जाट

Sun, 02 Oct 2016 02:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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नितिन और मोनू जाट
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 पुलिस, पीएसी, जोनल क्राइम ब्रांच, लोकल क्राइम ब्रांच, सर्विलांस टीम, एसटीएफ मिलाकर 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी। रोहटा से टीकरी के बीच जंगल का करीब तीस किलोमीटर एरिया। इस दायरे में पुलिस के जबरदस्त पहरे और रोजाना की कांबिंग के बीच अफसर दावा कर रहे थे कि मोनू जाट और नितिन टीकरी यहीं कहीं छिपे हो सकते हैं। इसके बावजूद दोनों शातिर पुलिस का चक्रव्यूह तोड़कर सोनीपत तक जा पहुंचे। जो साबित करता है कि मेरठ और बागपत पुलिस के बीच कोई कॉऑर्डिनेशन नहीं था और बिना ठोस इनपुट के केवल हवाई कांबिंग कर रहे थे।
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सोनीपत पुलिस के दावों पर यकीन करें तो मोनू जाट और नितिन तीन दिन से सोनीपत में ही एक बंद कोठी में छिपे थे। जो स्थानीय पुलिस के मुखबिर तंत्र और आंकलन को भी धता साबित करता है। दरअसल पुलिस अफसर लगातार यही दावा करते आ रहे थे कि मोनू जाट साथियों के साथ रोहटा के जंगलों में ही छिपा है। गिरफ्तारी के बाद मोनू ने इसकी पुष्टि भी की। लेकिन अगर सूत्रों की बात पर यकीन करें तो मोनू ने 23 सितंबर के बाद रोहटा का जंगल छोड़ दिया था। 22 सितंबर की रात मोनू ने रोहटा में चमड़ा व्यापारी की हत्या कर दी थी। जिसके बाद उसे गांव से जंगल में खाना और मदद पहुंचने में दिक्कत आ गई थी। माना जा रहा है कि सेटिंग करने के लिए मोनू और नितिन जंगल के रास्ते से ही निकल भागे थे और पुलिस अफसर और फोर्स केवल कयासों पर ही 30 सितंबर की शाम तक जंगलों की खाक छानती रही।

मोनू ने खेला शातिर दांव
मोनू ने ऐसा शातिर दांव खेला कि धुरंधर अफसर चित हो गए। ऐसा नहीं कि उसे पुलिस अफसरों का खौफ नहीं था। वह जानता था कि अगर मेरठ या बागपत में वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो बचेगा नहीं। इसलिए उसने योजना के मुताबिक अफवाह फैलवा दी कि वह मेरठ-बड़ौत मार्ग पर रोहटा के पास जंगल में नलकूप पर छिपा है। ऐसी ही अफवाह उसने बागपत के टिकरी के जंगल में छिपे होने की फैला दी। पुलिस का पूरा अमला जंगल में उसकी खाक छानता रहा और उसने सोनीपत जाकर पहले खुद को सेफ साइड किया और फिर सेटिंग बिछाकर सरेंडर कर दिया।
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यह लगी थी फोर्स
रोहटा निवासी मोनू जाट रंगदारी न देने पर लोगों की हत्या कर रहा था। गांव में दहशत का माहौल था। मोनू ने गांव के करीब 25 लोगों को रंगदारी न देने पर जान से मारने की धमकी दे रखी थी। 10 लोगों को वह मार चुका था। रोहटा में पुलिस और पीएसी का पहरा लगा तो मोनू ने नितिन के गांव टीकरी बागपत में भी दो लोगों की हत्या कर दी। मोनू पर 50 हजार का इनाम करते हुए उसे दबोचने के लिए मेरठ के दो एएसपी, तीन सीओ, बीस दरोगा और तीन इंस्पेक्टरों के अलावा 50 पुलिसकर्मियों की टीम केवल उसकी तलाश में लगी थी। एसटीएफ ने अलग से जाल बिछा रखा था। पुलिस का सर्विलांस सेल रोहटा में ही काम कर रहा था तो जोनल और लोकल क्राइम ब्रांच के अलावा पीएसी जवानों ने गांव में डेरा डाल रखा था। बागपत पुलिस तो अलग से थी।

धरे रह गए दावे
सूत्रों के मुताबिक मोनू जाट को पुलिस अफसरों ने जिंदा या मुर्दा दबोचने की कसम तक खा ली थी। एसपी देहात डॉ. प्रवीन रंजन, सीओ सरधना बृजेश सिंह और तेजतर्रार इंस्पेक्टर राजेश वर्मा ने कसम खाई थी कि मोनू को वह जिंदा या मुर्दा पकड़कर गोली मारेंगे। सीओ सरधना का सहारनपुर ट्रांसफर हो गया था, बावजूद उनको मोनू ऑपरेशन के लिए रोका गया। एसपी देहात ने तो एलान किया था कि मोनू को दो गोली तो वह जरूर मारेंगे।

मुसीबत अभी टली नहीं
रोहटा के ग्रामीणों को शनिवार सुबह मोनू और नितिन की गिरफ्तारी का पता चला तो उन्हें थोड़ी राहत जरूर मिली। लेकिन कुछ ग्रामीणों ने कहा कि मुसीबत अभी टली नहीं है। क्योंकि मोनू तो पहले एलान कर चुका था कि अब वह जेल से बड़े बदमाशों की तरह रंगदारी मांगा करेगा। ग्रामीणों में अभी भी मेरठ पुलिस के प्रति आक्रोश है। उनकी मांग है कि मोनू को पकड़ने में विफल रहने वाली पुलिस रंगदारी से तो निजात दिलाए।

एक सिपाही ने कराई सेटिंग
चर्चा है कि मोनू को सोनीपत में सरेंडर कराने में दिल्ली पुलिस के एक सिपाही का बड़ा हाथ है। इस सिपाही ने ही पूरी सेटिंग कराई। तीन दिन पहले सिपाही से मोनू ने संपर्क किया था। मेरठ पुलिस भी स्वीकार कर रही है कि मोनू सेटिंग से सोनीपत में सरेंडर हुआ है।

सरेंडर के पीछे किसका दिमाग  
मेरठ। मोनू को सोनीपत में सरेंडर कराने के पीछे किसका दिमाग चला है। पुलिस यहीं कयास लगाने में लगी है। पुलिस का एक ही दावा है कि एनकाउंटर के डर से मोनू ने खुद को सरेंडर किया है। सवाल है कि पुलिस चार दिन पहले उसको बीमार और साइको किलर बताने में लगी थी। तो अब उसके में दिमाग कैसे यह बात आई कि उसको सोनीपत सरेंडर करना चाहिए।

क्या मिलेगा उसको फायदा
मोनू जाट को दूसरे राज्य में सरेंडर करने से फायदा ही होगा। वरिष्ठ अधिवक्ता अमित दीक्षित का कहना है कि सोनीपत सरेंडर होने के बाद मेरठ पुलिस अब उसको टार्चर नहीं कर सकती। सोनीपत जेल से उसको कड़ी सुरक्षा में मेरठ कचहरी में पेशी पर लाया करेगी। जब तक सोनीपत में दर्ज हुआ मुकदमे में जमानत नहीं मिलेगी, तब तक वह मेरठ जेल में शिफ्ट नहीं होगा। मोनू ने अपनी जान ही नहीं बचाई, बल्कि मेरठ पुलिस की कार्रवाई भी कमजोर कर दी। हालांकि गवाहों पर केस मजबूती से चलेगा।
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