बदलते सामाजिक परिवेश और बढ़ते एकल परिवारों के चलन में फैमिली काउंसलर की सलाह का चलन बढ़ गया है। लोग पारिवारिक परेशानियों को सुलझाने के लिए फै मिली काउंसलर का सहारा ले रहे हैं। इस कतार में महिलाओं के साथ पुरुष भी शामिल हैं। काउंसलिंग का यह तरीका दरकते परिवारों के लिए संजीवनी बन रहा है। शहर में बढ़ रहे फैमिली काउंसलिंग के इस नए ट्रेंड पर नजर डालती यह स्टोरी
केस एक-- धैर्य रखने से हल होगी समस्या
अदिति और राकेश फै मिली प्रॉब्लम्स को लेकर लंबे समय से तनाव में थे। अदिति कहती है छोटी-छोटी बातें कब मनमुटाव पैदा कर देती हैं, हमें पता नहीं चलता। ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए हमने वक्त रहते फैमिली काउंसलर का सहारा लिया। जिसके बाद सब कुछ ठीक हो गया।
केस दो--सोच बदलने से बनी बात
सुनील और दीपा ने बताया कि जनरेशन गैप के साथ दो लोगों की सोच भी बदलती है। सोच का अंतर विवाद की वजह बन जाता है। हमारे साथ भी ऐसा हुआ, लेकिन समय रहते हमने काउंसलर से कंसर्ट किया। एक माह में चार सिटिंग हुई तो सारी परेशानी दूर हो गई।
केस तीन-- फैमिली को भी चाहिए टाइम
रिलेशनशिप काउंसलर की मदद से अच्छी जिंदगी जीने वाले राहुल और अंजली बहुत खुश हैं। राहुल ने बताया कि मैं परिवार को वक्त नहीं दे पाता था, जो मुझे देना चाहिए था। इस वजह से थोड़े डिसप्यूट हुए। हमने मिलकर काउंसलर से सलाह ली और सब कुछ ठीक हो गया।
सेमिनार और वर्कशाप तक पहुंचे मसले
निजी संबंधों में खटास, परिवार में बढ़ती दूरियां या आपसी मनमुटाव की जो बातें अभी तक घर की चारदीवारी में कैद रहती थीं, अब उनको सुलझाने के लिए शहर में सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन भी होने लगा है। कार्यशालाओं में विशेषज्ञों द्वारा लोगों को पर्सनल रिलेशनशिप को सुधारने का मंत्र दिया जा रहा है। इन कार्यशालाओं में भाग लेने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। शहर में जुलाई के अंत में होने वाली ऐसी ही एक कांफ्रेंस के लिए 30 कपल्स पंजीयन करा चुके हैं।
काउंसलर्स के पास आ रहीं ये परेशानियां
. बहू सास की या सास बहू की बात नहीं मानती
. हसबैंड- वाइफ एक दूसरे क ो वक्त नहीं दे पाते
. बच्चे को स्कूल छोड़ना, लाना, ख्याल रखने में सहयोग न देना
. नए, पुराने लोगों की सोच में है अंतर
. घर का सामान यहां वहां क्यों रखा जाता है
. मदर इन लॉ हमेशा बहू से अपने जमाने की बात करती हैं
. एक दूसरे की बात न मानना, उसे काटना
रिश्तों को सुधारने में जरूरी बातें
. बच्चों के सामने रिश्तों का अच्छा मॉडल पेश करें।
. छोटी-छोटी बातों का इश्यू न बनाएं।
. ऑफिस की टेंशन घर में न निकालें।
. एक दूसरे की तारीफ भी करें।
. छोटे-बड़े हर मैटर मिलकर सुलझाएं।