बहुचर्चित करन कौशिक हत्याकांड में हत्यारोपी ताज मोहम्मद और सलमान लंगड़ा की जमानत हाईकोर्ट ने निरस्त कर दी है। दो सप्ताह के भीतर आरोपियों को न्यायालय में आत्मसमर्पण करना होगा। अन्यथा आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए जाएंगे।
सिविल लाइन थाना क्षेत्र के सुभाष नगर गली नंबर दो के रहने वाले राकेश कौशिक के बेटे करन कौशिक की 11 सितंबर 2013 को हत्या कर दी गई थी। शव को आरोपियों ने कब्रिस्तान में दफना दिया था। इस वारदात को लेकर सुभाष नगर में बवाल हो गया था। दो संप्रदाय से जुड़ा मामला होने के कारण शहर में कई दिन तनाव रहा था। वर्तमान में आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
आरोप है कि शुरू से ही आरोपी राकेश कौशिक पर मुकदमा वापस लेने के दबाव बना रहा है। थाना मेडिकल में धमकी के मामले में धारा 506 आईपीसी के अन्तर्गत एफआईआर भी दर्ज की गई थी। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने आरोपियों की जमानत निरस्त कराने के प्रयास शुरू किए थे।
पिता ने हाईकोर्ट में लगाई थी अर्जी
करन के पिता राकेश कौशिक ने हाईकोर्ट में जमानत निरस्त कराने के लिए अर्जी लगाई थी। हाईकोर्ट में राकेश कौशिक के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ जे. ने याचिका पर सुनवाई कर 12 मई को फैसला सुरक्षित कर लिया। शनिवार को न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए आरोपियों की जमानत निरस्त करने का आदेश दिया। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश का पालन कराया जाएगा।
गवाहों को धमकी के पत्र भेजकर भी डराया गया था
इस केस के चश्मदीद गवाहों को भी पत्र भेजकर धमकी दी गई थी। वारदात के गवाह राकेश कौशिक, चाचा अशोक कौशिक, डॉ. मनीष शर्मा, मुकेश गुप्ता, प्रदीप गुप्ता व पुनीत रस्तोगी थे। राकेश कौशिक ने सुरक्षाकर्मी की मांग की थी।
फर्जी टीसी से नाबालिग दिखाने की कोशिश की
आरोपी ताज मोहम्मद की फर्जी टीसी बनाकर उसे नाबालिग दिखाया गया था। इस मामले में राकेश कौशिक ने पूर्व में मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार से शिकायत की थी। पूर्व बीएसए के खिलाफ भी जांच बैठ गई थी। इसके बाद उस पर कार्रवाई की गई।