कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की हत्या के बाद उनकी बेटी रुबी के अपहरण ने सूबे की सियासत को गरम कर दिया है। शुक्रवार को एक तरफ अपहृत बेटी के लिए बिलखता परिवार था, तो दूसरी तरफ गांव में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी लगी रही। सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के जमावड़े को देखते हुए सुबह से ही गांव के चारों ओर पुलिस की तैनाती से गांव छावनी में तब्दील हो गया था। गांव की सीमा से ढाई किमी पहले ही बैरिकेडिंग कर दी गई थी। एसएसपी, एसपी देहात, एसपी ट्रैफिक, चार सीओ, 20 इंस्पेक्टर, 150 दरोगा समेत 500 से अधिक पुलिसकर्मी गांव में तैनात रहे। पुलिस के अलावा आरआरएफ की टीम भी मुस्तैद दिखाई दी।
सुबह 7:30 बजे से ही कपसाड़ गांव के बॉर्डर पर तनाव चरम पर पहुंच गया। पुलिस ने गांव की घेराबंदी कर दी थी। परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक सुनीता का अंतिम संस्कार करने से इन्कार कर दिया था। सपा विधायक अतुल प्रधान, भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष चरण सिंह और अन्य कार्यकर्ताओं के अलावा कांग्रेस नेता गांव जाने के लिए निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें सीमा पर ही रोक लिया। इस पर विधायक समेत सभी लोग गांव के बाहर ही सड़क पर धरने पर बैठ गए। सपा विधायक ने कहा कि अनुसूचित जाति की महिला की हत्या हुई है और बेटी का अपहरण हुआ है। यदि दूसरे समुदाय का यह मामला होता तो अब तक बुलडोजर की कार्रवाई हो चुकी होती। सरकार विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है और हर बार पुलिस को आगे कर देती है। लेकिन, वह लोगों की आवाज उठाते रहेंगे। विधायक ने कहा कि परिवार को जब तक न्याय नहीं मिल जाता, वह उनके हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे। करीब डेढ़ घंटे तक चली नारेबाजी और नोकझोंक के बाद मृतका सुनीता के पति सतेंद्र और बेटे भी धरना स्थल पर पहुंच गए। माहौल इतना बिगड़ा कि पुलिस को अंतत रास्ता देना पड़ा।
भाई ने पूछा- मेरी बहन आएगी या नहीं
धरने के दौरान सबसे भावुक कर देने वाला पल तब आया, जब सुनीता का बेटा नरसी रोते हुए विधायक अतुल प्रधान से लिपट गया। उसने सिसकते हुए पूछा- विधायक जी, बस इतना बता दो, मेरी बहन अब वापस आएगी या नहीं। इस सवाल ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।
परिजनों की ये थीं मांगे
मुख्य आरोपी पारस सोम और उसके साथियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।
आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलाया जाए।
बेटी रुबी को अपहर्ताओं के चंगुल से मुक्त कराकर सुरक्षित और सकुशल वापसी।
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दिल्ली- लखनऊ तक मची हलचल
इस मामले ने लखनऊ से दिल्ली तक हलचल मचा दी। बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक्स पर पोस्ट के बाद गांव में नेताओं का तांता लग गया। सपा विधायक अतुल प्रधान और गुलाम मोहम्मद ने परिजनों से मुलाकात की। इसके अलावा सपा जिलाध्यक्ष कर्मवीर गुमी, पूर्व विधायक योगेश वर्मा, पूर्व विधायक विनोद हरित, भीम आर्मी जिलाध्यक्ष बिजेंद्र सूद, बाबर चौहान, आसपा जिलाध्यक्ष चरण सिंह भी पहुंचे। वहीं, भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा, रालोद के जिला पंचायत सदस्य प्रताप लोईया भी गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। अतुल प्रधान ने निजी कोष से दो लाख रुपये की आर्थिक मदद सौंपी। वहीं, अखिलेश यादव ने भी पीड़ित परिवार से फोन पर बात की और तीन लाख रुपये देने की बात कही। सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल के माध्यम से वार्ता की।
पुलिस ने निकाला फ्लैग मार्च
गांव के बिगड़ते हालात को देखते हुए डीआईजी कलानिधि नैथानी, जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार और एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने खुद मोर्चा संभाला। भारी पुलिस बल के साथ गांव की गलियों में फ्लैग मार्च निकाला गया ताकि कोई बड़ा बवाल न हो जाए। जिलाधिकारी व एसएसपी दोपहर 12 बजे के आसपास गांव में पहुंच गए थे। दोनों अधिकारी दो घंटे तक गांव में मौजूद रहे और कई विषयों पर पीड़ित परिवार से बात की। वहीं प्रशासन के अधिकारियों ने पांच बार परिजनों के साथ बंद कमरे में वार्ता की, लेकिन शाम सात बजे तक कोई हल नहीं निकला। बाद में अधिकारियों के आश्वासन पर परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हुआ। 10 से अधिक टीम आरोपियों की कर रही तलाश
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि आरोपी पारस व उसके परिवार की तलाश के लिए 10 टीम काम कर रही हैं। आरोपियों के रिश्तेदारों का पता किया जा रहा है। साथ ही कुछ करीबियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। पारस व उसके परिवार के मोबाइल नंबर को सर्विलांस के माध्यम से ट्रेस किया जा रहा है। जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आरोपी के घर पर पुलिस की टीम निगरानी बनाए हुए हैं।
महिलाओं ने पुलिस- प्रशासन को दिखाईं चूड़ियां
समाजसेवी नेहा गौड़ व सुनीता की घर की महिलाओं ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पुलिस प्रशासन के सामने हंगामा किया। महिलाओं ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया और नारेबाजी की। इस दौरान महिलाओं ने पुलिस प्रशासन को चूड़ियां दिखाईं। महिला पुलिसकर्मियों ने हंगामा कर रही महिलाओं को किसी तरह समझाकर शांत किया।
गांव की ज्यादातर गलियों में पसरा रहा सन्नाटा
गांव की ज्यादातर सड़क शाम के समय तक सूनसान रहीं। कुछ जगह पर बुजुर्ग आपस में बात करते हुए दिखाई दिए। गांव की तमाम गलियों में ग्रामीणों से ज्यादा पुलिस के जवान नजर आए। तनाव के चलते अधिकांश ग्रामीणों ने बच्चों को घरों से नहीं निकलने दिया और स्वयं भी छतों से ही बाहर देखते रहे। सीमाएं सील किए जाने के कारण नौकरीपेशा लोग भी गांव से बाहर नहीं जा पाए।
सरधना। गांव कपसाड़ में परिजनों से वार्ता करने पहुंचे पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालि