चर्चित कपसाड़ कांड में अनुसूचित जाति की युवती रूबी के अपहरण के विरोध पर उसकी मां सुनीता की हत्या के आरोपी पारस सोम की उम्र पर सुनवाई अब किशोर न्याय बोर्ड में होगी। अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट एससीएसटी एक्ट मोहम्मद असलम सिद्दीकी ने यह आदेश जारी किया है। इसी के साथ इस केस की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को भेज दी गई।
मां की हत्या कर बेटी के अपहरण के मुख्य आरोपी पारस सोम के बालिग या नाबालिग होने पर अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट एससी एसटी एक्ट के यहां सुनवाई हुई। वादी (रूबी) पक्ष की ओर से एडीजीसी मोहित गुप्ता ने न्यायालय में पक्ष रखा। उनकी दलील थी कि आरोपी की उम्र की जांच के लिए उसका पांचवीं कक्षा का रिकॉर्ड तलब किया जाना आवश्यक है। इसका प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता संजीव राणा व बलराम सोम ने कड़ा विरोध किया। प्रतिवादी के अधिवक्ताओं का कहना था कि जन्मतिथि 10वीं कक्षा की मार्कशीट के आधार पर तय होती है। इसलिए पारस सोम की 10वीं की मार्कशीट का रिकॉर्ड न्यायालय में दाखिल किया गया है।
इसके बाद न्यायालय में वादी की ओर से उनके अधिवक्ता ने पांचवीं की टीसी भी न्यायालय में दाखिल की। न्यायालय ने पत्रावली में मौजूदा साक्ष्यों में पाया कि पारस सोम की उम्र घटना के दिन 17 साल 08 महीने 12 दिन थी। सोमवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनते हुए इस हत्याकांड की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को भेजने का आदेश दिया। अब इस मुकदमे की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में होगी।
सियासी रंग चढ़ने से देश भर में सुर्खियों में छाया रहा कपसाड़ कांड
सरधना थाना क्षेत्र के गांव कपसाड़ में आठ जनवरी को रूबी अपनी मां सुनीता के साथ सुबह करीब आठ बजे गन्ने की छिलाई करने के लिए जा रही थी। गांव के बाहर रजबहे की पटरी पर पारस सोम ने रूबी का अपहरण कर लिया और विरोध करने पर उसकी मां सुनीता को सिर पर फरसे से प्रहार कर मौत की नींद सुला दिया। रूबी के भाई नरसी कुमार की ओर से सरधना थाने पर हत्या, अपहरण और एससीएसटी एक्ट की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह वारदात देश- विदेश तक सुर्खियों में छाई रही। वारदात पर सियासत से कपसाड़ राजनीति का अखाड़ा बन गया था। इस पर पुलिस ने गांव की नाकेबंदी कर किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। पुलिस ने घेराबंदी कर वारदात के तीसरे दिन 10 जनवरी की शाम को रूबी को रुड़की रेलवे स्टेशन से तलाश कर आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार कर लिया था।