आशा ज्योति केंद्र से रूबी को उसके पिता व भाई के साथ कार में बैठाकर घर भेज दिया गया। भाई नरसी से लिपट कर रूबी मां को याद कर बार-बार रोए जा रही थी। परिजनों ने बताया कि रास्ते भर उसके होंठों से बार-बार सिर्फ मां का नाम निकल रहा था। पांचवें दिन रूबी घर पहुंची। रास्ते भर सुबक-सुबक कर रोती रूबी मंझले भाई मनदीप और शिवम के कंधे पर सिर रखकर बेसुध हो गई।
घर पहुंचने पर रूबी ने बार-बार मां का नाम लिया। रूबी को उसके भाई नरसी और बुआ सर्वेश देवी ने बार-बार संभाला। सोमवार रात करीब आठ बजे रूबी के घर लौटने की खबर फैलते ही गांव में हलचल मच गई। उसे देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ लग गई। पुलिस ने इसे देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए।
भाई नरसी, बुआ सर्वेश और पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की कि घर के बाहर न निकलें और फोन पर अनावश्यक बातचीत न करें। प्रशासन ने भी स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी तरह की अफवाह न फैलने पाए। पुलिस ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गांव में पांच जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए और हर गली- सड़क पर पुलिसकर्मी तैनात किए हैं। पूरे गांव को छावनी में तब्दील करते हुए पुलिस ने निगरानी कड़ी कर दी।
यह है मामला
सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में आठ जनवरी बृहस्पतिवार सुबह रूबी अपनी मां सुनीता के साथ गन्ने की छिलाई करने के लिए जा रही थी। गांव के बाहर रजबहे पर गांव के ही आरोपी पारस सोम ने रूबी का अपहरण कर लिया था। विरोध करने पर उसकी मां सुनीता की फरसे से सिर पर वार कर हत्या कर दी थी। पीड़ित परिवार अनुसूचित जाति से है। इसे लेकर प्रदेश की सियासत में गरमाई हुई है। विपक्ष ने इस मामले को मुद्दा बनाया बनाया हुआ है। वारदात के तीसरे दिन शनिवार देर शाम को पुलिस ने युवती रूबी को सकुशल तलाश कर आरोपी पारस सोम को रुड़की से गिरफ्तार कर लिया था।