रंग-बिरंगी और आकर्षक कावड़ों के साथ शिवभक्त बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयघोष करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। बाईपास पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक संगठनों की ओर से कावड़ सेवा शिविर लगाए गए हैं। शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए भोजन, शीतल पेयजल, चिकित्सा, विश्राम तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। स्वयंसेवक पूरी श्रद्धा के साथ कावड़ियों की सेवा में जुटे हैं।
दिल्ली रोड सहित प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। कावड़ यात्रा के चलते मेरठ का वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया है। मंदिरों, शिविरों और मार्गों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है तथा जगह जगह शिवभक्तों के स्वागत और सेवा की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं।
नीलकंठ के दर्शन से पहले ही पूरी हो गई मनोकामना
भोले नाथ से जो मांगोंगे वही मिलेगा। इनके दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। बेटे की मिन्नत मांगते हुए कांवड़ लेने गए थे। भोले ने उनकी सुन ली। बीच रास्ते में ही घर से बेटा होने का फोन आ गया। चार बेटियों के बाद घर में बेटा आया है।
यह कहना है कि हरियाणा प्रदेश के गुरुग्राम निवासी कांवड़ियां सतेंद्र का। सतेंद्र अपने भाई यशपाल के साथ हरिद्वार से कांवड़ लेकर आ रहे हैं। छाती पर गंगाजल बंधा है। बम-बम भोले का जयघोष करते हुए मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। कंकरखेड़ा व्यापार संघ के शिविर में यशपाल ने बताया कि सतेंद्र उनके छोटे भाई हैं। इनके चार बेटियां हैं।
पूरा परिवार भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि परिवार में चार बहनों को एक भाई भी मिले। इसी मिन्नत के साथ कांवड़ लेने हरिद्वार गए थे। सतेंद्र के अनुसार जब नीलकंठ के दर्शन के लिए जा रहे थे तो उसी समय घर से फोन आया कि भगवान भोलेनाथ ने उनकी मनोकामना पूरी कर दी। बहनों को भाई मिल गया है।