मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र के राली चौहान गांव में शनिवार रात डाक कांवड़ के 11 हजार केवी की हाईटेंशन लाइन से टकराने के हादसे में शिकार हुए सभी लोग जल चढ़ाकर घर पहुंचने के जोश से भरे हुए थे। उन्हें नहीं पता था कि गांव की दहलीज पर ही मौत उनका इंतजार कर रही है। कांवड़िये गाते हुए गांव की तरफ बढ़ रहे थे और ग्रामीण उनके स्वागत में भजन गा रहे थे, लेकिन गांव से एक किमी पहले ही हादसा हो गया।
गांव से कांवड़ ले जाने वाले इस माह के शुरूआत से ही सभी डाक कांवड़ को लेकर उत्साहित थे। जिसके लिए चंदा इकट्ठा किया गया। पूरा बंदोबस्त होने के बाद 13 तारीख को हंसी-खुशी के साथ ट्रैक्टर पर डाक कांवड़ लेने के लिए गांव से निकल गए थे। ट्रैक्टर-ट्राली पर डीजे लगाया गया था। औघड़नाथ मंदिर में जल चढ़ाने के बाद उन्होंने गांव में फोन कर जानकारी दे दी थी कि कुछ घंटे बाद वह पहुंच जाएंगे। ग्रामीणों ने उनके स्वागत को लेकर पूरी तैयारियां भी कर ली थीं।
सभी भोले के गानों पर नाचते-गाते हुए गांव की तरफ बढ़ रहे थे, लेकिन एक ही पल में हंसी-खुशी का यह माहौल मातम में पसर गया। हादसे में जान गंवाने वाले हिमांशु, महेंद्र, प्रशांत, लखमी और मनीष ने यह सोचा भी नहीं होगा कि वह गांव की तरफ नहीं बढ़ रहे, बल्कि मौत उन्हें अपनी तरफ खींच रही है। बताया जा रहा है कि उन्हें रविवार सुबह गांव में जाना था, लेकिन मंदिर में जल चढ़ने के बाद तय किया गया कि अब सीधे गांव में ही जाएंगे।
ग्रामीण बोले, भोलेनाथ ऐसी क्या गलती हुई हमसे
हादसे के बाद जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो सभी इधर-उधर पड़े थे। जिन्हें देखकर चीत्कार मच गई। आनन-फानन में अलग-अलग अस्पतालों में लेकर पहुंचे। कुछ ग्रामीण बोले भगवान भोलेनाथ ऐसे क्या गलती हुई जो यह मनहूस पल दिखाया। सभी लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई से चंदा इकट्ठा किया था और पूरी भक्ति के साथ गंगाजल लेकर आए थे। यह हादसा अब पीड़ित परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे गया। हादसे का पता चलते ही गांव का बच्चा, बुजुर्ग और महिलाएं घटनास्थल की तरफ दौड़ पड़े। छिलौरा समेत कई अन्य गांवों के ग्रामीण भी वहां पहुंच गए। किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में यह पहला हादसा है जिससे पूरे गांव में चीत्कार मच गई। इस दर्दनाक मंजर को जीवन भर नहीं भूलाया जा सकता।
दो दिन पहले गुरुग्राम में भी इसी तरह हुआ था हादसा
13 जुलाई को गुरुग्राम में भी बड़ा हादसा होने से बच गया था। हालांकि एक कांवड़िये की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य बाल-बाल बच गए थे। कैंटर में अधिक ऊंचाई पर साउंड सिस्टम लगााया गया था, जो बिजली के तारों में उलझ गया था। बिजली का पोल टूटकर कैंटर पर गिर गया था। इसमें प्रियांशु की मौत हो गई थी। इसके अलावा भी डाक कांवड़ में पहले भी कई बार हादसे हो चुके हैं। इसकी वजह यह है कि डाक कांवड़ में साउंड सिस्टम को काफी ऊंचाई तक लगाया जाता है, जो अक्सर हादसे का सबब बनता है।