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पशुपालकों की पीड़ा नहीं हर पा रही है कामधेनु

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हर्रा कस्बे में एक कामधेनु डेयरी पर संचालित चिलर प्लांट। - फोटो : SARDANA
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सरूरपुर/सरधना/खरखौदा। सपा सरकार द्वारा दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए शुरू की गई कामधेनु योजना छह वर्ष में ही नाकाम साबित होने लगी है। वर्ष 2013 में कामधेनु इसके अगले वर्ष मिनी कामधेनु तथा वर्ष 2015 में माइक्रो कामधेनु योजना की शुरुआत की गई थी। इनके फायदेमंद साबित नहीं होने के पीछे योजना में चूक मानी जा रही है। मार्केटिंग इनकी विफलता की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके सही ढंग से क्रियान्वित नहीं होने से बढे़ घाटे के चलते डेयरियां बंद होने लगी हैं।
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दूध का उत्पादन बढ़ाकर पशुपालकों की बेहतरी के लिए कामधेनु योजना का शुरू की गई थी। जिले के सरूरपुर ब्लॉक अंतर्गत हर्रा, पांचली बुजुर्ग, करनावल में कामधेनु डेयरी की स्थापना की गई। वहीं, सरधना में एक कामधेनु एवं दो मिनी कामधेनु डेयरी शुरू की गई हैं। वहीं, खरखौदा के धनतला, पांची एवं चंदपुरा में डेयरी संचालन शुरू किया गया। ये डेरियां किसानों ने बडे़ उत्साह के साथ शुरू की थीं परंतु योजना की खामियाें इसे कुछ समय में ठंडा कर दिया। सरकार ने डेयरी तो खुलवा दी। इसके लिए बैंकों से पांच वर्ष तक बिना ब्याज कर्ज की सुविधा दी र्गई परंतु योजना के दूसरे पक्षों पर ध्यान नहीं दिया गया। धरातल पर आई दुश्वारियों से किसान निपटने में सक्षम नहीं हो हुए तो वे घाटे में चले गए। अब जमीन बेचकर किसी तरह बैंक का कर्ज चुकाने को मजबूर हैं।
हर्रा कामधेनु डेयरी के संचालक डॉ. आरिफ का कहना है कि इस योजना से लाभ उन्हें नहीं मिल सका। वहीं, कस्बा हर्रा निवासी अबरार अली ने बताया कि सपा सरकार में उनकी सौ भैंस की कामधेनु डेयरी स्वीकृृत हुई थी। चारा और रखरखाव महंगा होने तथा दूध का उचित दाम नहीं मिलने से डेयरी घाटे में चली गई है। फिलहाल उनकी डेयरी पर करीब दो हजार लीटर दूध प्रतिदिन आपूर्ति उत्पादन है। दूध 49 रुपये प्रतिलीटर की दर से सप्लाई किया जा रहा है। कस्बा करनावल निवासी पूर्व चेयरमैन सतीश कुमार ने बताया कि करीब छह साल पहले उन्होंने कामधेनु डेयरी में सौ गाय से शुरूआत की थी। एक पशु पर रोजाना दो सौ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था। जिसके चलते डेयरी तीन साल में ही बंद कर दी। यह किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हुई है। कामधेनु माइक्रो डेयरी संचालक नाजिम चौहान का कहना है कि सूखा चारा नष्ट हो जाना तथा अचानक बीमारी आ जाना नुकसान का कारण बनती है। सही प्रबंधन के अभाव में यह योजना किसानों के लिए फायदेमंद नहीं है। इनकी डेयरी से करीब आठ सौ लीटर दूध 46 से 48 रुपये प्रतिलीटर की दर से बिक रहा है। यदि दूध शहर में 60 से 65 रुपये के बीच बेचा रहा है।
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सरधना तहसील के गांव कुशावली निवासी भानू प्रताप उर्फ बबलू का कहना है कि सरकार द्वारा साढे़ 12 प्रतिशत ब्याज मुक्त की किस्त यदि समय से नहीं अदा की गई तो पंद्रह फीसदी ब्याज देना पड़ता है। दूध के रेट कम मिलने से घाटा बढ़ रहा है। दूध 36 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि पिछले वर्ष तीस रुपये लीटर था। सरकार को दूध की मार्केटिंग की व्यवस्था करनी चाहिए थी। किसान पांच वर्ष तक ब्याज मुक्त ऋण के लालच में फंसकर बर्बाद हो रहे हैं।
खरखौदा क्षेत्र में कामधेनु डेयरी भूले सिंह निवासी कूड़ी एवं नीरज कुमार निवासी चंदपुरा, पांची निवासी चेतन त्यागी, धनतला निवासी चंद्रभान सिंह निवासी धनतला खानपुर निवासी विप्ति, नगलापातू के ज्ञानी सिंह, धर्मवती एवं चंदपुरा निवासी सतीश कुमार मिनी व माइक्रो डेयरी संचालित कर रखी हैं। भूले सिंह व नीरज के अनुसार डेयरी खोलने से पहले उचित प्रशिक्षण, पशुपालन विभाग द्वारा क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुरूप रिपोर्ट नहीं भेजना, प्रोजेक्ट तैयार करने में अधिक खर्च आना, व्यावसायिक प्रशिक्षण न दिया जाना, दूध के दाम कम होना, पशुओं का वैज्ञानकि विधि से भरण पोषण न होना, पशुओं में बांझपन बढ़ना आदि सहित कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। जिस कारण समय से बैंक का ऋण अदा नहीं किया गया। बैंक की किस्त समय से न जाने पर पशुपालन विभाग ने इस ऋण पर मिलने वाले ब्याज को नहीं अदा किया। लागातार बैंक का ऋण बढ़ने पर पशु बेचकर ऋण की भरपाई गई। जिस कारण डेयरी को बंद करना पडा। इसके बाद भी ऋण बाकी है।
इन डेयरियों के बारे में अभी ठोस जानकारी नहीं है। एक सप्ताह पहले ही जिले में तैनाती मिली है। इस मामले में गंभीरता से जानकारी करके संचालकों के लिए डेयरी कारोबार में हरसंभव मदद की जाएगी। जिससे उनके लिए इस कारोबार को फायदेमंद बनाया जाएगा।-अनिल कंसल, सीवीओ मेरठ।
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