भाई कल्याण सिंह के निधन पर रोती बहन सुभद्रा शर्मा।
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मेरठ में शाहपीर गेट के निकट खत्ता पर सुभद्रा शर्मा का रो-रोकर बुरा हाल था। बिलखते हुए कह रही थीं, रक्षाबंधन से एक दिन पहले भाई दुनिया छोड़कर चला गया। कल्याण सिंह से उनके 50 साल से रिश्ते थे। जब भी मेरठ आते थे, उनके घर आते थे। वह उनसे जुड़ी तमाम स्मृतियों को संजोए हुए हैं, लेकिन कहती हैं कि इन्हें छापिये मत। मेरी आखिरी इच्छा अधूरी रह गई। मैं हर रोज प्रार्थना करती थी कि कल्याण सिंह को कुछ और आयु मिले ताकि वह भव्य राम मंदिर के दर्शन कर सकें।
कल्याण सिंह बहन के रूप में सुभद्रा शर्मा से रिश्ते को कितनी अहमियत देते थे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1992 में मुख्यमंत्री रहते हुए वह उनकी बेटी नीलिमा की शादी में शामिल ही नहीं हुए बल्कि भात देने की रस्म भी निभाई। शनिवार रात टेलीफोन पर जब कल्याण सिंह के निधन पर उनसे बातचीत की गई तो वह आंसुओं को नहीं रोक पाई। कहा, मेरी बेटी एक साल की थी, तब से उनसे भाई के रिश्ते हैं। उसकी शादी में कल्याण सिंह मुख्यमंत्री रहते आए थे। राजस्थान के राज्यपाल पद से सेवानिवृत्त के कुछ दिन पहले ही मैं जयपुर राजभवन में गई थी। 15 दिन रुकी थी।
वहीं उनसे जुड़ी स्मृतियां कुरेदने पर उन्होंने कहा, मैं नि:शब्द हूं। देश की राजनीति का लौह पुरुष चला गया। उनका निधन देश की क्षति है। वह राम मंदिर निर्माण के प्रबल समर्थक थे। वह रामजी के लिए ही राजनीति में आए थे। सुभद्रा शर्मा पिछले 50 साल से जिस भैया की कलाई पर राखी बांधकर व्रत खोला करती थी, टीवी पर उनके निधन की खबर सुनते ही वह सुधबुध खो बैठी।
सांत्वना देने पर उन्होंने कहा, भाई को खोने का दर्द जीवन भर नहीं भुला पाऊंगी। 20 साल तक बेटी नीलिमा के जन्म दिन पर कल्याण सिंह ही केक काटा करते थे।