काली नदी का सिमटता दायरा ग्रामीणों के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। बारिश के पानी की निकासी न होने के कारण लोगों को और परेशानी होगी। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कचरे से नदी में सिल्ट जम गई है, साथ ही लोगों ने अतिक्रमण भी कर लिया है। इससे नदी का क्षेत्र सिमटता जा रहा है।
काली नदी खतौली से दौराला, रजपुरा और सरधना ब्लाक के गांवों और शहरी क्षेत्र के लिए समस्या बन गई है। नदी में कई स्थानों पर सिल्ट इतनी अधिक है, कि वहां से पानी नहीं निकल पाएगा। नदी के किनारे दर्जनों गांव बसे हैं। सिल्ट के कारण पानी निकलेगा नहीं, ऐसे में बारिश का पानी गांवों में एकत्र होगा।
इससे लोगों के लिए समस्या पैदा होगी। वहीं नदी की चपेट में आ रहे मामूरी गांव के भी हालत ठीक नहीं हैं। यहां इतनी अधिक सिल्ट जमी हुई है कि किसान परेशान हैं। सिल्ट जमा होने के कारण कई जगह पर पानी रुका है, जो पूरी तरह से प्रदूषित है और आसपास के क्षेत्र को भी जहरीला बना रहा है। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।
विधायक, मंत्री नहीं सुनते
मामूरी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि काली नदी क्षेत्र की प्रमुख समस्या है, लेकिन विधायक और मंत्री इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। आरोप लगाया कि किसान पानी के कारण बीमार हो या फिर कैंसर से मर जाए, लेकिन जनप्रतिनिधियों को केवल वोट से मतलब है।