वोट डालने के लिए लाइन में लगे मतदाता
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद रालोद ने जाट-मुस्लिम गठजोड़ में जान फूंकने के लिए कवायद शुरु की। इसी के चलते रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने मुजफ्फरनगर से ही सामाजिक समरसता का अभियान शुरु किया। मुजफ्फरनगर और शामली में जाट-मुस्लिमों को एक मंच पर लाने के लिए सम्मेलन किए। साथ ही कई मुस्लिम नेताओं को रालोद में शामिल करके भी यही संदेश दिया गया।
इसके अलावा कैराना उपचुनाव में प्रत्याशी का चयन करने में भी उसी बात पर फोकस किया गया कि किस तरह जाट- मुस्लिम को एक मंच पर लाया जा सके। यही वजह है कि सपा विधायक नाहिद हसन की मां तबस्सुम हसन को रालोद के टिकट पर प्रत्याशी बनाया गया।
प्रत्याशी के चयन को लेकर पहले तो राजनीतिक हलकों में यह चर्चा रही कि रालोद ने गलत दांव खेल दिया है, लेकिन जैसे-जैसे चुनावी पारा चढ़ा, वैसे ही समीकरणों में बदलाव शुरु हो गया। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने शामली और सहारनपुर जनपद में चुनाव प्रचार के दौरान भी जाट-मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत करने पर जोर दिया।
वहीं, शामली जिले के गठवाला खाप के गांवों में लगातार यह संदेश दिया कि पुराने झगड़ों को भूलकर भाजपा के खिलाफ एक मंच पर आने की जरूरत है। इसके साथ ही चौधरी अजित सिंह यह संदेश देने में भी कामयाब रहे कि यदि इस चुनाव में मजबूती नहीं दिखाई, तो भविष्य के लिए बड़ा नुकसान हो जाएगा।
इसका असर यह रहा कि 28 मई को मतदान और बुधवार को जब पुन: मतदान हुआ, तो जाट-मुस्लिम मतदाताओं में रालोद के प्रति नाराजगी दिखाई नहीं दी। जाट-मुस्लिम मतदाताओं को एक तरफ करने में तो रालोद कामयाब रही
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/