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कैराना: तबस्सुम हसन बोलीं- 2019 के लोकसभा चुनाव में UP से भाजपा को मिलेंगी सिर्फ 3 सीटें

Thu, 31 May 2018 08:01 PM IST
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, शामली
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गठबंधन प्रत्याशी तबस्सुम हसन
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कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव के नतीजे आ रहे हैं। वहीं कैराना में लगभग तस्वीर साफ हो गई है कि गठबंधन प्रत्याशी तबस्सुम हसन जीत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। वहीं तबस्सुम ने एक टीवी चैनल पर कहा कि आगे के चुनाव बीजेपी हारेगी। इसके अलावा उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा यूपी से सिर्फ तीन लोकसभा सीटें जीतेगी। बाकी सभी (77) सीटें हम जीतेंगे।

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रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन ने कहा कि हम सबको साथ लेकर चलेंगे और विकास करेंगे। उन्होंने कहा कि आगे भी इसी तरह मिलकर चलेंगे।

कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में जीत हार तो मतगणना से तय होगी, लेकिन रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने जिस सियासी समीकरण को साधने के लिए कसरत की, उसमें वह काफी हद तक सफल नजर आए।  

दरअसल, लंबे समय तक रालोद की जातीय ताकत जाट-मुस्लिम गठजोड़ रहा था, लेकिन 2013 में जब मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक दंगा हुआ, तो जाट मुस्लिम समीकरण पूरी तरह बिखर गया था। इसका बड़ा खामियाजा रालोद को ही भुगतना पड़ा था। इसी कारण 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में रालोद को बड़ा नुकसान हुआ था। मुजफ्फरनगर और शामली जिले में एक भी सीट रालोद को नहीं मिल सकी थी।
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पढ़ें : LIVE: कैराना में आरएलडी की तबस्सुम 27 हजार और नूरपुर में सपा प्रत्याशी 5 हजार वोटों से आगे

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वोट डालने के लिए लाइन में लगे मतदाता - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद रालोद ने जाट-मुस्लिम गठजोड़ में जान फूंकने के लिए कवायद शुरु की। इसी के चलते रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने मुजफ्फरनगर से ही सामाजिक समरसता का अभियान शुरु किया। मुजफ्फरनगर और शामली में जाट-मुस्लिमों को एक मंच पर लाने के लिए सम्मेलन किए। साथ ही कई मुस्लिम नेताओं को रालोद में शामिल करके भी यही संदेश दिया गया।  

इसके अलावा कैराना उपचुनाव में प्रत्याशी का चयन करने में भी उसी बात पर फोकस किया गया कि किस तरह जाट- मुस्लिम को एक मंच पर लाया जा सके। यही वजह है कि सपा विधायक नाहिद हसन की मां तबस्सुम हसन को रालोद के टिकट पर प्रत्याशी बनाया गया।

प्रत्याशी के चयन को लेकर पहले तो राजनीतिक हलकों में यह चर्चा रही कि रालोद ने गलत दांव खेल दिया है, लेकिन जैसे-जैसे चुनावी पारा चढ़ा, वैसे ही समीकरणों में बदलाव शुरु हो गया। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने शामली और सहारनपुर जनपद में चुनाव प्रचार के दौरान भी जाट-मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत करने पर जोर दिया।

वहीं, शामली जिले के गठवाला खाप के गांवों में लगातार यह संदेश दिया कि पुराने झगड़ों को भूलकर भाजपा के खिलाफ एक मंच पर आने की जरूरत है। इसके साथ ही चौधरी अजित सिंह यह संदेश देने में भी कामयाब रहे कि यदि इस चुनाव में मजबूती नहीं दिखाई, तो भविष्य के लिए बड़ा नुकसान हो जाएगा।

इसका असर यह रहा कि 28 मई को मतदान और बुधवार को जब पुन: मतदान हुआ, तो जाट-मुस्लिम मतदाताओं में रालोद के प्रति नाराजगी दिखाई नहीं दी। जाट-मुस्लिम मतदाताओं को एक तरफ करने में तो रालोद कामयाब रही

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