कैराना लोकसभा सीट पर आए चुनाव परिणाम ने हर किसी को चाैंका दिया है। यहां इकरा हसन ने भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चाैधरी को कड़ी टक्कर दी और जीत हासिल की है। इकरा हसन अपने भाई को जेल से छुड़ाने के लिए लंदन से आई थीं, लेकिन यहां राजनीति में उनकी दिलचस्पी इस कदर पैदा हुई कि वे दो वर्ष में ही सांसद बन गईं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चर्चित कैराना लोकसभा सीट पर इकरा के प्रदर्शन ने हर किसी को चाैंका दिया है। इस सीट पर उन्होंने भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चाैधरी को तगड़ी पटखनी दी है। कैराना लोकसभा सीट पर वर्ष 1962 से लेकर अब तक 16 बार चुनाव हो चुका है। जिसमें भाजपा का दबदबा रहा है। लेकिन इस बार पासा पलट गया।
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भाजपा ने इस सीट पर अब तक तीन बार जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस दो और सपा दो, जनता दल दो बार जीत दर्ज कर चुकी है। इस बार इस सीट पर इकरा हसन समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर मैदान में थीं। आज मतगणना शुरू हुई तो शुरुआत में पिछड़ती नजर आईं लेकिन दोपहर बाद इकरा ने बढ़त बना ली जो अंत तक बरकरार रही।
कैराना सीट पर इकरा के टिकट होने के बाद से ही कैराना लोकसभा सीट पर नए समीकरण बन गए थे। वहीं, अखिलेश द्वारा कैराना लोकसभा सीट से इकरा हसन को प्रत्याशी बना दिए जाने के बाद भाजपा-बसपा और सपा में कांटे की टक्कर मानी जा रही थी।
क्षेत्र की जनता न सिर्फ उनकी सादगी की कायल थी बल्कि उन्हें बेटी की तरह प्यार भी दिखाया। क्षेत्र की जनता ने उन्हें बंपर मतों से जिताकर यह भी दिखा दिया कि इस भूमि के लिए बेटियां भी बेटों से कम नहीं हैं। आगे जाने इकरा हसन के बारे में।
कौन हैं इकरा हसन?
इकरा हसन पिछले नौ वर्ष से कैराना क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय हैं। वह पूर्व सांसद तबस्सुम हसन की बेटी हैं और नाहिद हसन उनके बड़े भाई हैं। इकरा हसन ने लंदन की यूनिवर्सिटी से कानून की शिक्षा हासिल की है।
पार्टी : सपा प्रत्याशी : इकरा हसन उम्र : 27 वर्ष शिक्षा : दिल्ली विश्व विद्यालय से एलएलबी पोस्ट ग्रेजुएशन : यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से । परिवार: मां तबस्सुम हसन और भाई नाहिद हसन।
लंदन में पढ़ाई के दौरान सीएए का विरोध कर आईं थीं सुर्खियों में आईं थीं इकरा
इकरा की शुरुआती शिक्षा भले ही कैराना में हुई हो, लेकिन उन्होंने 12वीं दिल्ली के क्वींस मेरी स्कूल से की थी। इसके बाद लेडी श्रीराम कालेज से ग्रेजुएशन किया। दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की। इसके बाद उन्होंने इंटरनेशनल लाॅ एंड पालिटिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से किया था।
यही नहीं वे पिछले कहा जाता है कि इकरा हसन राजनीति में बहुत मेहनत करती रही हैं। सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रियता देखने को मिलती है।
सपा प्रत्याशी इकरा हसन
- फोटो : अमर उजाला
भाई के जेल जाने के अगले दिन ही संभाली राजनीति की बागडोर
इकरा पूर्व सांसद रहे चौधरी अख्तर हसन की पौत्री और पूर्व सांसद रहे मुनव्वर हसन और तब्बसुम हसन की बेटी और नाहिद हसन की बहन हैं। पिछले काफी समय से इकरा हसन कैराना लोकसभा सीट पर चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई थीं।
गाैरतलब है कि नाहिद हसन को 15 जनवरी 2022 को पुलिस ने कोर्ट में गैंगस्टर के मुकदमे में सरेंडर करने से पहले गिरफ्तार कर लिया था। भाई के जेल जाने के अगले ही दिन से इकरा हसन लगातार प्रचार-प्रसार में जुट गई थीं। उन्होंन हसन परिवार की राजनीति की बागडोर अपने कंधों पर ले ली थी।
सपा प्रत्याशी इकरा हसन।
- फोटो : अमर उजाला
लोकसभा चुनाव जीतना पहली प्राथमिकता: इकरा हसन
कैराना लोकसभा चुनाव के लिए सपा से प्रत्याशी घोषित होने के बाद इकरा हसन ने कहा था कि वह अभी चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त थी। कहा कि उनके परिवार का पहला चुनाव नहीं है। मजबूती से वह लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। चुनाव जीतना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।
जाहिर है कि उन्होंने ये दिखा भी दिया। उन्होंने क्षेत्र के सियासी गणित को समझा और अपने राजनीति के अनुभव का बखूबी इस्तेमाल कर इस बार चुनाव में इसका बखूबी इस्तेमाल किया।
फ्लैश बैक की बात करें तो वर्ष 2012 में गंगोह विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में प्रदीप चौधरी चुनाव मैदान में उतरे थे। उस समय हसन परिवार की तबस्सुम हसन, उनके बेटे नाहिद हसन बसपा में थे और गंगोह विधानसभा से बसपा प्रत्याशी के रूप में टिकट मांग रहे थे। टिकट नहीं मिलने के कारण हसन परिवार के नाहिद हसन को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में गंगोह विधानसभा से चुनाव लड़ना पड़ा।
इस विधानसभा चुनाव में प्रदीप चौधरी ने नाहिद को हराकर जीत हासिल की थी। तबस्सुम हसन और उनके बेटे नाहिद हसन सपा में शामिल हो गए थे। वर्ष 2017 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामकर प्रदीप चौधरी ने गंगोह से विधानसभा का चुनाव जीता था। इस चुनाव में प्रदीप चौधरी ने गंगोह विधानसभा में बसपा के नौमान मसूद को हराया था।
भाजपा हाईकमान ने विधायक प्रदीप चौधरी को वर्ष 2019 के कैराना लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया। प्रदीप चौधरी ने तबस्सुम हसन को 92 हजार वोट से हराकर विजय हासिल की।
वर्ष 2024 में भाजपा हाईकमान ने फिर से प्रदीप चौधरी को कैराना लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप उतारा था। उनके सामने तीसरी बार हसन परिवार से सपा कांग्रेस गठबंधन की प्रत्याशी के रूप में इकरा हसन थीं। हसन परिवार और प्रदीप चौधरी परिवार एक बार फिर लोकसभा चुनाव में आमने-सामने था।
इकरा हसन
- फोटो : अमर उजाला
यह है कैराना लोकसभा सीट का इतिहास
कैराना लोकसभा सीट वर्ष 1962 में अस्तित्व में आई थी। यहां पर अब तक 15 और एक उपचुनाव हो चुका है। इस सीट पर सबसे पहले वर्ष 1962 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में यशपाल सिंह ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने 134581 मत प्राप्त किए थे। इस सीट पर भाजपा तीन, कांग्रेस दो और सपा दो बार जीत दर्ज कर चुकी है। जनता दल भी इस सीट पर दो बार जीत दर्ज कर चुकी है।
वर्तमान में ये सीट भाजपा के कब्जे में है। यहां से भाजपा के प्रदीप चौधरी ने 2019 में सपा की तबस्सुम बेगम को हराकर चुनाव जीता था। सत्ता में वापसी की टकटकी लगाए बैठी कांग्रेस 2019 में भी इस सीट पर बुरी तरह हार गई थी। कांग्रेस के हरेंद्र मलिक तीसरे स्थान पर रहे थे। इस सीट पर सियासतदानों की निगाहें टिकीं थीं।
कैराना लोकसभा पर इस तरह रहा इकरा का प्रदर्शन-
दोपहर 2 बजे तक की मतगणना के बाद इकरा 68687 मतों से आगे हो गईं थी। इसके बाद 72801 से आगे हो गईं। मतगणना के अंतिम राउंड में वह 70812 वोटों से जीत गईं।
क्षेत्र का विकास पहली प्राथमिकता: इकरा हसन
कैराना लोकसभा सीट से इकरा हसन ने सांसद बनने के बाद कहा कि क्षेत्र के लोगों ने उन्हें जो प्यार दिया है, उन पर भरोसा जताया है, अब उनकी बारी है कि वे उनके हित में काम करें और किसानों की समस्याओं को संसद में उठा सकें।