लोकसभा में उत्तर प्रदेश से पहली बार 2014 में ऐसा हुआ कि एक भी मुस्लिम सांसद लोकसभा में नहीं पहुंचा। इस 16वीं लोकसभा के लिए उत्तर प्रदेश में 80 सीटों पर चुनाव हुआ था, लेकिन मोदी लहर के बीच ऐसा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ कि एक भी मुस्लिम सांसद लोकसभा में निर्वाचित होकर नहीं पहुंचा। तबस्सुम की जीत के बाद उत्तर प्रदेश का न केवल यह आंकड़ा बदला, बल्कि तबस्सुम इस 16वीं लोकसभा में उत्तर प्रदेश से अकेली मुस्लिम सांसद निर्वाचित होकर लोकसभा में पहुंची। जबकि इससे पहले आजादी के बाद से हुए लोकसभा चुनावों में कभी ऐसा नहीं हुआ कि उत्तर प्रदेश से एक भी मुस्लिम सांसद निर्वाचित न हुआ हो। लेकिन 2014 में यह एक आश्चर्यजनक परिणाम था कि करीब 30 प्रतिशत मुस्लिमों की हिस्सेदारी वाले उत्तर प्रदेश से एक भी मुस्लिम सांसद निर्वाचित नहीं हो पाया। लेकिन तब्बसुम ने अपनी जीत के साथ लोकसभा चुनाव के इतिहास में अपना एक अलग अध्याय जोड़ दिया।