कांवड़ यात्रा की तैयारी में पूरा स्थानीय तंत्र जुटा है। तहसील के लेखपालों से लेकर डीएम तक सभी सड़कों पर हैं। इसके अलावा अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों की कांवड़ ड्यूटी लगा दी गई है। इस कारण सरकारी विभागों में कामकाज लगभग ठप हो चुका है।
जिला प्रशासन के लिए कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराना बड़ी चुनौती है। हालांकि हर साल ही प्रशासन इसको लेकर मशक्कत करता है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में कांवड़ यात्रा होने के कारण मामला थोड़ा गंभीर है। ऐसे में प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। डीएम अनिल ढींगरा और एसएसपी लगातार जनपद के एक-एक कांवड़ मार्ग और व्यवस्था का स्वयं निरीक्षण कर रहे हैं।
कांवड़ यात्रा के लिए 22 जोनल और 63 सेक्टर मजिस्ट्रेट सहित करीब डेढ़ सौ अन्य मजिस्ट्रेट तैनात है। इन मजिस्ट्रेट की नियुक्ति में प्रशासन के अधिकारियों के अलावा एमडीए, नगर निगम, शिक्षा विभाग, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग विकास भवन, विद्युत विभाग आदि विभागों के अधिकारी लगाये गये हैं। यही नहीं जो अधिकारी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात नहीं है, वह अपनी विभागीय स्तर से कांवड़ यात्रा की व्यवस्था को देखने के लिए तैनात कर दिए गए हैं।
इस समय स्थिति ये है कि लेखपाल अपने-अपने क्षेत्र में कांवड़ यात्रा की व्यवस्था का जायजा लेकर रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को दे रहे हैं। अन्य विभागों के कर्मचारी भी इसी व्यवस्था में जुटे हैं। हाल ये है कि सरकारी दफ्तरों के अधिकांश काम कांवड़ यात्रा के कारण लंबित हो गये हैं। तमाम जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया भी कांवड़ यात्रा तक टाल दी गईं हैं।